Yajurveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

Yajurveda Adhyay 16 / Mantra 41

66 Mantra
16/41
Devata- रुद्रा देवताः Rishi- परमेष्ठी प्रजापतिर्वा देवा ऋषयः Chhand- स्वराडार्षी बृहती Swara- मध्यमः
Mantra with Swara
नमः॑ शम्भ॒वाय॑ च मयोभ॒वाय॑ च॒ नमः॑ शङ्क॒राय॑ च मयस्क॒राय॑ च॒ नमः॑ शि॒वाय॑ च शि॒वत॑राय च॥४१॥

नमः॑। श॒म्भ॒वायेति॑ शम्ऽभ॒वाय॑। च॒। म॒यो॒भ॒वायेति॑ मयःऽभ॒वाय॑। च॒। नमः॑। श॒ङ्क॒रायेति॑ शम्ऽक॒राय॑। च॒। म॒य॒स्क॒राय॑। म॒यः॒क॒रायेति॑ मयःऽक॒राय॑। च॒। नमः॑। शि॒वाय॑। च॒। शि॒वत॑रा॒येति॑ शि॒वऽत॑राय। च॒ ॥४१ ॥

Mantra without Swara
नमः शम्भवाय च मयोभवाय च नमः शङ्कराय च मयस्कराय च नमः शिवाय च शिवतराय च ॥

नमः। शम्भवायेति शम्ऽभवाय। च। मयोभवायेति मयःऽभवाय। च। नमः। शङ्करायेति शम्ऽकराय। च। मयस्कराय। मयःकरायेति मयःऽकराय। च। नमः। शिवाय। च। शिवतरायेति शिवऽतराय। च॥४१॥

Yajurveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

हिन्दी
Yajurveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar) - हिन्दी
Meaning
१. (शम्भवाय च नमः) = [शम्भावयति तस्मै परमेश्वराय सेनाध्यक्षाय वा द०] राष्ट्र में सब उपद्रवों को शान्त करके शान्ति का स्थापन करनेवाले प्रभु व सेनापति का हम आदर करते हैं (च) = और (मयोभवाय) = [pleasure, delight, satisfaction] शत्रुओं के नाश के द्वारा सब सुखों का उत्पादन करनेवाले प्रभु व सेनापति का हम सम्मान करते हैं। २. (शङ्कराय च नमः) = [ शं लौकिकं सुखं करोति-म० ] शान्ति स्थापन के द्वारा सब सांसारिक सुखों को देनेवाले राष्ट्र के मुख्य पुरुष का हम आदर करते हैं, (च) = और उन्नति का वातावरण प्राप्त कराके (मयस्काराय) = मोक्षसुख को प्राप्त करानेवाले के लिए हम सम्मान का भाव रखते हैं [मय: = मोक्षसुखं करोति-म० ] ३. (शिवाय च नमः) = कल्याणरूप निष्पाप के लिए हम नमस्कार करते हैं, (च) = और (शिवतराय च) = अत्यन्त कल्याणरूप के लिए हम मान देते हैं।
Essence
भावार्थ - राष्ट्र में 'शं, मयः व शिव 'शान्ति, सुख व कल्याण करनेवालों का हम मान करें।
Subject
शान्ति व सुख का राज्य Peace, [ Plenty ] Pleasure