Yajurveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

Yajurveda Adhyay 16 / Mantra 39

66 Mantra
16/39
Devata- रुद्रा देवताः Rishi- कुत्स ऋषिः Chhand- स्वराडार्षी पङ्क्तिः Swara- पञ्चमः
Mantra with Swara
नमो॒ वात्या॑य च॒ रेष्म्या॑य च॒ नमो॑ वास्त॒व्याय च वास्तु॒पाय॑ च॒ नमः॒ सोमा॑य च रु॒द्राय॑ च॒ नम॑स्ता॒म्राय॑ चारु॒णाय॑ च॥३९॥

नमः॑। वात्या॑य। च॒। रेष्म्या॑य। च॒। नमः॑। वा॒स्त॒व्या᳖य। च॒। वा॒स्तु॒पायेति॑ वास्तु॒ऽपाय॑। च॒। नमः॑। सोमा॑य। च॒। रु॒द्राय॑। च॒। नमः॑। ता॒म्राय॑। च॒। अ॒रु॒णाय॑। च॒ ॥३९ ॥

Mantra without Swara
नमो वात्याय च रेष्म्याय च नमो वास्तव्याय च वास्तुपाय च नमः सोमाय च रुद्राय च नमस्ताम्राय चारुणाय च नमः शङ्गवे ॥

नमः। वात्याय। च। रेष्म्याय। च। नमः। वास्तव्याय। च। वास्तुपायेति वास्तुऽपाय। च। नमः। सोमाय। च। रुद्राय। च। नमः। ताम्राय। च। अरुणाय। च॥३९॥

Yajurveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

हिन्दी
Yajurveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar) - हिन्दी
Meaning
१. (वात्याय च नमः) = वायु-विद्या में कुशल अतएव वायु के रुख की सूचना देने के कार्य में नियुक्त मेटेरौलौजिकल विभाग के अध्यक्ष के लिए हम आदर देते हैं, (च) = और (रेष्याय) = [रिष हिंसायाम्] रेष्म में होनेवाले डिस्ट्रक्शन के कार्य में नियुक्त स्लम क्लियरैन्स आदि कार्यों में नियुक्त व्यक्ति का भी हम आदर करते हैं। २. (वास्तव्याय च नमः) = गृहों में नियुक्त, अर्थात् गृहों के निर्माण में नियुक्त पुरुष का हम आदर करते हैं, (च) = और (वास्तुपाय) = निर्मित गृहों के रक्षण कार्य में [मैण्टिनैन्स में] नियुक्त पुरुष के लिए भी हम सम्मान का भाव धारण करते हैं। ३. (सोमाय च नमः) = सोमादि ओषधियों के विज्ञान व प्रयोग में कुशल शरीरभूत औषध ही बने हुए वैद्य के लिए हम नतमस्तक होते हैं, (च) = और उन औषधों के द्वारा (रुद्राय) = [रुत् रोगं द्रावयति] रोगों को दूर भगानेवाले के लिए हम आदर देते हैं। ४. (ताम्राय च नमः) = ताम्र आदि धातुओं से निर्मित भस्मादि के प्रयोग में कुशल व्यक्ति का भी हम आदर करते हैं, (च) = और इन धातुओं के कुशल प्रयोग से (अरुणाय) = [प्रापकाय - द०] स्वास्थ्य को फिर से प्राप्त करानेवाले वैद्य के लिए हम आदर की भावनावाले होते हैं। ५. मन्त्र के उत्तरार्ध का अर्थ इस प्रकार भी हो सकता है कि (सोमाय) = सौम्य स्वभाववाले (रुद्राय) = ज्ञान देकर औरों के दुःखों को दूर करनेवाले का हम आदर करते हैं। हम उस पुरुष का आदर करते हैं जो (ताम्राय) = [ताम्यति ग्लायति] बुरे कर्मों के करने से ग्लानि करता है तथा अरुणाय शुभ कर्मों को प्राप्त कराने के लिए प्रयत्नशील होता है।
Essence
भावार्थ - राष्ट्र के उत्थान में भिन्न-भिन्न कार्यों में लगे हुए सब व्यक्तियों का विशेषत: रोगों को दूर करके प्रजा के जीवन को सुखी बनानेवाले औषध विज्ञान के पण्डित व प्रयोग में कुशल वैद्यों का हम आदर करते हैं।
Subject
स्वभाव-भेद व कार्यभेद