Yajurveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

Yajurveda Adhyay 16 / Mantra 37

66 Mantra
16/37
Devata- रुद्रा देवताः Rishi- कुत्स ऋषिः Chhand- निचृदार्षी त्रिष्टुप् Swara- धैवतः
Mantra with Swara
नमः॒ स्रुत्या॑य च॒ पथ्या॑य च॒ नमः॒ काट्या॑य च॒ नीप्या॑य च॒ नमः॒ कुल्या॑य च सर॒स्याय च॒ नमो॑ नादे॒या॑य च वैश॒न्ताय॑ च॥३७॥

नमः॑। स्रुत्या॑य। च॒। पथ्या॑य। च॒। नमः॑। काट्या॑य। च॒। नीप्या॑य। च॒। नमः॑। कुल्या॑य। च॒। स॒र॒स्या᳖य। च॒। नमः॑। ना॒दे॒याय॑। च॒। वै॒श॒न्ताय॑। च॒ ॥३७ ॥

Mantra without Swara
नमः स्रुत्याय च पथ्याय च नमः काट्याय च नीप्याय च नमः कुल्याय च सरस्याय च नमो नादेयाय च वैशन्ताय च नमः कूप्याय ॥

नमः। स्रुत्याय। च। पथ्याय। च। नमः। काट्याय। च। नीप्याय। च। नमः। कुल्याय। च। सरस्याय। च। नमः। नादेयाय। च। वैशन्ताय। च॥३७॥

Yajurveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

हिन्दी
Yajurveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar) - हिन्दी
Meaning
१. (स्स्रुत्याय च नमः) = स्रोतों-नाले आदि में नियुक्त पुरुष का हम आदर करते हैं (च) = और (पथ्याय च) = उन वारिप्रवाहों के साथ-साथ बने हुए मार्गों के शोधक पुरुष के लिए हम आदर देते हैं । २. (काट्याय च नमः) = कूप आदि में नियुक्त पुरुष का हम आदर करते हैं, (च) = और (नीप्याय) = [ नीचैः पतन्त्यापो यत्र] बड़े गहरे जलाशयों में नियुक्त पुरुष का भी हम सम्मान करते हैं । ३. (कुल्याय च नमः) = नहरों का प्रबन्ध करनेवाले के लिए हम आदर देते हैं, (च) = और (सरस्याय) = तालाब [Tanks] आदि के काम में प्रसिद्ध होनेवाले के लिए हम मान का भाव धारण करते हैं। ४. (नादेयाय च नमः) = नदियों के विषय में नियुक्त पुरुष के लिए हम नमस्कार करते हैं, (च) = तथा (वैशन्ताय च) = छोटे-छोटे जोहड़ों- (अल्पसरः) = [ponds] का ध्यान करनेवाले का हम सत्कार करते हैं।
Essence
भावार्थ - राष्ट्र में भिन्न-भिन्न स्थानों में नियुक्त जलाध्यक्षों का उचित आदर करना चाहिए। इनके कार्य की शुद्धि पर ही राष्ट्र में सारे क्षेत्रों की सिंचाई निर्भर है, अन्नोत्पादन में इनका स्थान बड़ा महत्त्वपूर्ण है। अतः
Subject
जिलाध्यक्ष