Yajurveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

Yajurveda Adhyay 16 / Mantra 32

66 Mantra
16/32
Devata- रुद्रा देवताः Rishi- कुत्स ऋषिः Chhand- स्वराडार्षी त्रिष्टुप् Swara- धैवतः
Mantra with Swara
नमो॑ ज्ये॒ष्ठाय॑ च कनि॒ष्ठाय॑ च॒ नमः॑ पूर्व॒जाय॑ चापर॒जाय॑ च॒ नमो॑ मध्य॒माय॑ चापग॒ल्भाय॑ च॒ नमो॑ जघ॒न्याय च बु॒ध्न्याय च॥३२॥

नमः॑। ज्ये॒ष्ठाय॑। च॒। क॒नि॒ष्ठाय॑। च॒। नमः॑। पू॒र्व॒जायेति॑ पूर्व॒ऽजाय॑। च॒। अ॒प॒र॒जायेत्य॑पर॒ऽजाय॑। च॒। नमः॑। म॒ध्य॒माय॑। च॒। अ॒प॒ग॒ल्भायेत्य॑पऽग॒ल्भाय॑। च॒। नमः॑। ज॒घ॒न्या᳖य। च॒। बु॒ध्न्या᳖य। च॒ ॥३२ ॥

Mantra without Swara
नमो ज्येष्ठाय च कनिष्ठाय च नमः पूर्वजाय चापरजाय च नमो मध्यमाय चापगल्भाय च नमो जघन्याय च बुध्न्याय च नमः सोम्याय ॥

नमः। ज्येष्ठाय। च। कनिष्ठाय। च। नमः। पूर्वजायेति पूर्वऽजाय। च। अपरजायेत्यपरऽजाय। च। नमः। मध्यमाय। च। अपगल्भायेत्यपऽगल्भाय। च। नमः। जघन्याय। च। बुध्न्याय। च॥३२॥

Yajurveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

हिन्दी
Yajurveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar) - हिन्दी
Meaning
१. (ज्येष्ठाय) = अत्यन्त प्रशस्य ज्येष्ठ के लिए- आयुष्य के दृष्टिकोण से सबसे बड़े के लिए (नमः) = हम नमस्कार करते हैं, (च) = और (कनिष्ठाय) = आयुष्य के दृष्टिकोण से छोटे के लिए युवा व अल्प के लिए नमस्कार हो। पूर्वजाय सबसे प्रथम उत्पन्न हुए के लिए (च) = तथा (अपरजाय) = अपर काल में उत्पन्न हुए के लिए (नमः) = हम आदर का भाव रखते हैं। ३. (मध्यमाय) = पूर्वज व अपरज के मध्य में होनेवाले के लिए (नमः) = हम नमस्कार करते हैं, (च) = और (अपगल्भाय) = [अपगतो गल्भो यस्मात्, गल्भः व्युत्पन्नता धाष्यम्] अव्युत्पन्नेन्द्रियसांसारिक बातों में अप्रवीण छोटे बच्चे का भी हम आदर करते हैं। ४. (जघन्याय च) = जघन=पश्चाद्भाग में होनेवाले के लिए, अर्थात् शूद्रादि के लिए (नमः) हम नमस्कार करते हैं, (च) = और (बुध्न्याय) = बिल्कुल मूल में होनेवाले सबसे अन्तिम स्थानवाले अन्त्यजों का भी हम आदर करते हैं।
Essence
भावार्थ - राष्ट्र में उत्पन्न छोटे-बड़े तथा छोटे-बड़े कुलों में उत्पन्नों के लिए नमस्कार हो ।
Subject
छोटे-बड़े