Yajurveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

Yajurveda Adhyay 16 / Mantra 28

66 Mantra
16/28
Devata- रुद्रा देवताः Rishi- कुत्स ऋषिः Chhand- आर्षी जगती Swara- निषादः
Mantra with Swara
नमः॒ श्वभ्यः॒ श्वप॑तिभ्यश्च वो॒ नमो॒ नमो॑ भ॒वाय॑ च रु॒द्राय॑ च॒ नमः॑ श॒र्वाय॑ च पशु॒पत॑ये च॒ नमो॒ नील॑ग्रीवाय च शिति॒कण्ठा॑य च॥२८॥

नमः॑। श्वभ्य॒ इति॒ श्वऽभ्यः॑। श्वप॑तिभ्य॒ इति॒ श्वप॑तिऽभ्यः। च॒। वः॒। नमः॑। नमः॑। भ॒वाय॑। च॒। रु॒द्राय॑। च॒। नमः॑। श॒र्वाय॑। च॒। प॒शु॒पत॑य॒ इति॑ पशु॒ऽपत॑ये। च॒। नमः॑। नील॑ग्रीवा॒येति॒ नील॑ऽग्रीवाय। च॒। शि॒ति॒कण्ठा॒येति॑ शिति॒ऽकण्ठा॑य। च॒ ॥२८ ॥

Mantra without Swara
नमः श्वभ्यः श्वपतिभ्यश्च वो नमो नमो भवाय च रुद्राय च नमः शर्वाय च पशुपतये च नमो नीलग्रीवाय च शितिकण्ठाय च नमः कपर्दिने ॥

नमः। श्वभ्य इति श्वऽभ्यः। श्वपतिभ्य इति श्वपतिऽभ्यः। च। वः। नमः। नमः। भवाय। च। रुद्राय। च। नमः। शर्वाय। च। पशुपतय इति पशुऽपतये। च। नमः। नीलग्रीवायेति नीलऽग्रीवाय। च। शितिकण्ठायेति शितिऽकण्ठाय। च॥२८॥

Yajurveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

हिन्दी
Yajurveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar) - हिन्दी
Meaning
१. राष्ट्र में शिकार व पहरे आदि में उपयोगी, चोरी आदि के अन्वेषण में पुलिस की मदद करनेवाले (श्वभ्यः) = कुत्तों को (नमः) = अन्नादि द्वारा उचितरूप से आदृत करते हैं, (च) = और (वः) = आपके इन (श्वपतिभ्यः) = कुत्तों [Dog squads] को शिक्षित करनेवालों को (नमः) = हम आदर देते हैं। २. हम (नमः) = उस श्रेष्ठ गुण सम्पन्न ब्राह्मण का भी आदर करते हैं जो (भवाय) = [शुभगुणादि - द०] सदा उत्तम गुणों में ही निवास करता है (च) = और (रुद्राय) = [रुत् दुःखं द्रावयति] दुःख को दूर भगानेवाला है। ३. उस ब्राह्मण का नमः आदर करते हैं जो (शर्वाय) = [शृ हिंसायाम्] सब अशुभ वृत्तियों का संहार करनेवाला है (च) = तथा (पशुपतये) = [कामः पशुः, क्रोधः पशुः] काम, क्रोध आदि पाशव वृत्तियों को पूर्णरूप से अपने वश में रखता है, अथवा गवादि पशुओं का पालक है। ४. हम उस ब्राह्मण के लिए (नमः) = नमस्कार करते हैं जो नीलग्रीवाय विविध विद्याओं से सुभूषित ग्रीवावाला है (च) = तथा (शितिकण्ठाय) = शुद्ध कण्ठ- स्वरवाला है। जो कभी अपशब्दों का प्रयोग न करता हुआ सदा शुद्ध शब्दों का ही प्रयोग करता है।
Essence
भावार्थ- हम राष्ट्र के उन ब्राह्मणों का आदर करते हैं जो सदा शुभ गुणों में निवास करनेवाले, ज्ञान देनेवाले, बुराइयों का संहार करनेवाले, काम-क्रोध को वशीभूत करनेवाले, विद्याविभूषित कण्ठवाले तथा शुद्ध कण्ठ स्वरवाले हैं।
Subject
भव-रुद्र