Yajurveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

Yajurveda Adhyay 16 / Mantra 25

66 Mantra
16/25
Devata- रुद्रा देवताः Rishi- कुत्स ऋषिः Chhand- भुरिक् शक्वरी Swara- धैवतः
Mantra with Swara
नमो॑ ग॒णेभ्यो॑ ग॒णप॑तिभ्यश्च वो॒ नमो॒ नमो॒ व्राते॑भ्यो॒ व्रात॑पतिभ्यश्च वो॒ नमो॒ नमो॒ गृत्से॑भ्यो॒ गृत्स॑पतिभ्यश्च वो॒ नमो॒ नमो॒ विरू॑पेभ्यो वि॒श्वरू॑पेभ्यश्च वो॒ नमः॑॥२५॥

नमः॑। ग॒णेभ्यः॑। ग॒णप॑तिभ्य॒ इति॑ ग॒णप॑तिऽभ्यः। च॒। वः॒। नमः॑। नमः॑। व्राते॑भ्यः। व्रात॑पतिभ्य॒ इति॒ व्रात॑पतिऽभ्यः। च॒। वः॒। नमः॑। नमः॑। गृत्से॑भ्यः। गृ॒त्सप॑तिभ्य॒ इति॒ गृत्स॑पतिऽभ्यः। च॒। वः॒। नमः॑। नमः॑। विरू॑पेभ्य॒ इति॒ विऽरू॑पेभ्यः। वि॒श्वरू॑पेभ्य॒ इति॑ वि॒श्वऽरू॑पेभ्यः। च॒। वः॒। नमः॑ ॥२५ ॥

Mantra without Swara
नमो गणेभ्यो गणपतिभ्यश्च वो नमो नमो व्रातेभ्यो व्रातपतिभ्यश्च वो नमो नमो गृत्सेभ्यो गृत्सपतिभ्यश्च वो नमो नमो विरूपेभ्यो विश्वरूपेभ्यश्च वो नमो नमः सेनाभ्यः ॥

नमः। गणेभ्यः। गणपतिभ्य इति गणपतिऽभ्यः। च। वः। नमः। नमः। व्रातेभ्यः। व्रातपतिभ्य इति व्रातपतिऽभ्यः। च। वः। नमः। नमः। गृत्सेभ्यः। गृत्सपतिभ्य इति गृत्सपतिऽभ्यः। च। वः। नमः। नमः। विरूपेभ्य इति विऽरूपेभ्यः। विश्वरूपेभ्य इति विश्वऽरूपेभ्यः। च। वः। नमः॥२५॥

Yajurveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

हिन्दी
Yajurveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar) - हिन्दी
Meaning
१. (गणेभ्यः) = एक स्थान पर रहनेवालों ने जो सहकर्मकर्तृ संघ [Co-operative societies] बना लिये हैं, उन 'संघों' का (नमः) = हम आदर करते हैं (च) = और (वः) = आप (गणपतिभ्यः) = इन संघों के अध्यक्षों के लिए (नमः) - हम आदर देते हैं । २. (व्रातेभ्यः) = एक प्रकार के काम करनेवालों ने [जैसे टाङ्गेवाले, मोटरवाले, रिक्शावाले] जो संघात [ unions] बना लिये हैं, उन संघातों का हम (नमः) = आदर करते हैं (च) = और (व:) = आप (व्रातपतिभ्यः) = इन संघातों के मुखियाओं के लिए हम (नमः) = उचित सम्मानभाव रखते हैं। ३. (गृत्सेभ्यः) = [गृणन्ति] औरों के लिए सदा हित का उपदेश देनेवाले मेधावी पुरुषों के लिए (नमः) = नमस्कार हो, (च) = और (वः) = आपके इन (गृत्सपतिभ्यः) = विद्वानों के रक्षकों का [ जो धनी पुरुष इन विद्वानों को वृत्ति देकर परिपालित करते हैं, उनका ] (नमः) = हम आदर करते हैं। ४. (विरूपेभ्यः) = तेजस्विता के कारण विशिष्ट रूपवाले क्षत्रियों का (नमः) = हम आदर करते हैं, (च) = और (वः) = आप (विश्वरूपेभ्यः) = सबको अपना ही रूप समझनेवाले, 'वसुधैव कुटुम्बकम्' का सिद्धान्त माननेवालों के लिए हम (नमः) = नतमस्तक होते हैं।
Essence
भावार्थ- हम राष्ट्र में बने हुए गणों व व्रातों को उचित सम्मान दें। मेधावी पुरुष व तेजस्वी पुरुष तथा 'वसुधैव कुटुम्बकम्' के सिद्धान्त को माननेवाले पुरुष आदरणीय हैं।
Subject
गण-गणपति