Yajurveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

Yajurveda Adhyay 16 / Mantra 23

66 Mantra
16/23
Devata- रुद्रा देवताः Rishi- कुत्स ऋषिः Chhand- निचृदतिजगती Swara- निषादः
Mantra with Swara
नमो॑ विसृ॒जद्भ्यो॒ विद्ध्य॑द्भ्यश्च वो॒ नमो॒ नमः॑ स्व॒पद्भ्यो॒ जाग्र॑द्भ्यश्च वो॒ नमो॒ नमः॒ शया॑नेभ्य॒ऽआसी॑नेभ्यश्च वो॒ नमो॒ नम॒स्तिष्ठ॑द्भ्यो॒ धाव॑द्भ्यश्च वो॒ नमः॑॥२३॥

नमः॑। वि॒सृ॒जद्भ्य॒ इति॑ विसृ॒जत्ऽभ्यः॑। विद्ध्य॑द्भ्य॒ इति॒ विद्ध्य॑त्ऽभ्यः। च॒। वः॒। नमः॑। नमः॑। स्व॒पद्भ्य॒ इति॑ स्व॒पत्ऽभ्यः॑। जाग्र॑द्भ्य॒ इति॒ जाग्र॑त्ऽभ्यः। च॒। वः॒। नमः॑। नमः॑। शया॑नेभ्यः। आसी॑नेभ्यः। च॒। वः॒। नमः॑। नमः॑। तिष्ठ॑द्भ्य इति॒ तिष्ठ॑त्ऽभ्यः। धाव॑द्भ्य॒ इति॒ धाव॑त्ऽभ्यः। च॒। वः॒। नमः॑ ॥२३ ॥

Mantra without Swara
नमो विसृजद्भ्यो विध्यद्भ्यश्च वो नमो नमः स्वपद्भ्यो जाग्रद्भ्यश्च वो नमो नमः शयानेभ्यऽआसीनेभ्यश्च वो नमो नमस्तिष्ठद्भ्यो धावद्भ्यश्च वो नमो नमः सभाभ्यः ॥

नमः। विसृजद्भ्य इति विसृजत्ऽभ्यः। विद्ध्यद्भ्य इति विद्ध्यत्ऽभ्यः। च। वः। नमः। नमः। स्वपद्भ्य इति स्वपत्ऽभ्यः। जाग्रद्भ्य इति जाग्रत्ऽभ्यः। च। वः। नमः। नमः। शयानेभ्यः। आसीनेभ्यः। च। वः। नमः। नमः। तिष्ठद्भ्य इति तिष्ठत्ऽभ्यः। धावद्भ्य इति धावत्ऽभ्यः। च। वः। नमः॥२३॥

Yajurveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

हिन्दी
Yajurveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar) - हिन्दी
Meaning
१. (विसृजद्द्भ्यो नमः) = शत्रुओं पर बाणों को छोड़ते हुओं का हम आदर करते हैं [Honour to those] (विद्ध्यद्भ्यः च व:) = और तुममें से शत्रुओं का वेधन करते हुओं के लिए (नमः) = हम आदर देते हैं। २. अपना कार्य करने के बाद (स्वपद्भ्यः) = सोते हुओं का (नमः) = हम आदर करते हैं च उनके लिए भी (नमः) = आदर करते हैं जो (वः) = आपमें से (जाग्रद्भ्यः) = जाग रहे हैं- अपने कार्य में जागरूक हैं। ३. (शयानेभ्यः) = थककर लेटे हुओं का हम आदर करते हैं और (वः) = तुममें से (आसीनेभ्यः च) = बैठे हुओं का हम (नमः) = आदर करते हैं। ४. (वः) = आपमें से (तिष्ठद्भ्यः) = खड़े हुओं के लिए हम (नमः) = नमस्कार करते हैं (च धावद्भ्यः) = और कार्यवश इधर-उधर भागते हुओं का हम (नमः) = आदर करते हैं।
Essence
भावार्थ- हम उन सब रक्षा-पुरुषों का आदर करते हैं जो कार्य पर उपस्थित हैं या कार्य के बाद विश्राम की स्थिति में हैं।
Subject
कार्य व विश्राम