Yajurveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

Yajurveda Adhyay 16 / Mantra 20

66 Mantra
16/20
Devata- रुद्रो देवता Rishi- कुत्स ऋषिः Chhand- अतिधृतिः Swara- षड्जः
Mantra with Swara
नमः॑ कृत्स्नाय॒तया॒ धाव॑ते॒ सत्व॑नां॒ पत॑ये॒ नमो॒ नमः॒ सह॑मानाय निव्या॒धिन॑ऽआव्या॒धिनी॑नां॒ पत॑ये॒ नमो॒ नमो॑ निष॒ङ्गिणे॑ ककु॒भाय॑ स्ते॒नानां॒ पत॑ये॒ नमो॒ नमो॑ निचे॒रवे॑ परिच॒रायार॑ण्यानां॒ पत॑ये॒ नमः॑॥२०॥

नमः॑। कृ॒त्स्ना॒य॒तयेति॑ कृत्स्नऽआय॒तया॑। धाव॑ते। सत्व॑नाम्। पत॑ये। नमः॑। नमः॑। सह॑मानाय। नि॒व्या॒धिन॒ इति॑ निऽव्या॒धिने॑। आ॒व्या॒धिनी॑ना॒मित्याऽव्या॒धिनी॑नाम्। पत॑ये। नमः॑। नमः॑। नि॒ष॒ङ्गिणे॑। क॒कु॒भाय॑। स्ते॒नाना॑म्। पत॑ये। नमः॑। नमः॑। नि॒चे॒रव॒ इति॑ निऽचे॒रवे॑। प॒रि॒च॒रायेति॑ परिऽच॒राय॑। अर॑ण्यानाम्। पत॑ये। नमः॑ ॥२० ॥

Mantra without Swara
नमः कृत्स्नायतया धावते सत्वनाम्पतये नमो नमः सहमानाय निव्याधिनऽआव्याधिनीनाम्पतये नमो नमो निषङ्गिणे ककुभाय स्तेनानाम्पतये नमो नमो निचेरवे परिचरायारण्यानाम्पतये नमो वञ्चते नमो ॥

नमः। कृत्स्नायतयेति कृत्स्नऽआयतया। धावते। सत्वनाम्। पतये। नमः। नमः। सहमानाय। निव्याधिन इति निऽव्याधिने। आव्याधिनीनामित्याऽव्याधिनीनाम्। पतये। नमः। नमः। निषङ्गिणे। ककुभाय। स्तेनानाम्। पतये। नमः। नमः। निचेरव इति निऽचेरवे। परिचरायेति परिऽचराय। अरण्यानाम्। पतये। नमः॥२०॥

Yajurveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

हिन्दी
Yajurveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar) - हिन्दी
Meaning
१. गत मन्त्र की समाप्ति 'प्रान्तभाग पर नियुक्त रक्षकों के आदर' से हुई थी। उसी प्रसङ्ग को आगे कहते हैं कि (कृत्स्नायतया) = पूर्णरूप से [कृत्स्न] आयत खेंचे हुए आकर्णपूर्ण धनुष् के साथ (धावते) = रक्षा के लिए इधर-उधर भागते हुए अथवा सबके [आय] लाभ के दृष्टिकोण से गति करते हुए सत्वनां पतये प्राणियों के रक्षक का (नमः) = हम आदर करते हैं। २. सहमानाय= (अरीन् सहते अभिभवति) शत्रुओं का पराभव करनेवाले (निव्याधिने) = [नितरां और विध्यति] शत्रुओं का खूब वेधन करनेवाले के लिए (नमः) = हम नमस्कार करते हैं, (आव्याधिनीनाम्) = समन्तात् शत्रुओं का वेधन करनेवाली शूर सेनाओं के (पतये) = पति का (नमः) = हम आदर करते हैं। (निषङ्गिणे) = तलवारवाले के लिए [द०] अथवा बाण, असि, बन्दूक, तोप व तोमर आदि शस्त्रवाले के लिए (ककुभाय) = महान् के लिए [५०], प्रसन्नमूर्त्ति के लिए (नमः) = हम नमस्कार करते हैं। (ककुभाय) = जो देखने में शानदार [Grand] लगता है, उसके लिए, और (स्तेनानां पतये) = अन्याय से (परस्व) = पराये धन को लेनेवालों को [पातयिष्णवे - द०, दण्डादिशोषकाय] दण्डादि से शोषित करनेवाले को (नमः) = हम आदर देते हैं। ४. (निचेरवे) = [नितरां पुरुषार्थे चरति - द०] निरन्तर पुरुषार्थ के साथ विचरनेवाले (परिचराय) = धर्म, विद्या, माता-पिता, स्वामी व मित्रादि की सेवा करनेवाले के लिए तथा (अरण्यानां पतये) = अरण्य में निवास करनेवाले वानप्रस्थों के रक्षक के लिए (नमः) = हम नमस्कार करते हैं।
Essence
भावार्थ- चोरों व शत्रुओं से बचाकर सब वनस्थों की रक्षा करनेवाले राजपुरुषों को हम उचित आदर देते हैं।
Subject
रक्षक पुरुष