Yajurveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

Yajurveda Adhyay 15 / Mantra 60

65 Mantra
15/60
Devata- आपो देवताः Rishi- प्रियमेधा ऋषिः Chhand- विराडनुष्टुप् Swara- गान्धारः
Mantra with Swara
ताऽअ॑स्य॒ सूद॑दोहसः॒ सोम॑ꣳ श्रीणन्ति॒ पृश्न॑यः। जन्म॑न्दे॒वानां॒ विश॑स्त्रि॒ष्वारो॑च॒ने दि॒वः॥६०॥

ताः। अ॒स्य॒। सूद॑दोहस॒ इति॒ सूद॑ऽदोहसः। सोम॑म्। श्री॒ण॒न्ति॒। पृश्न॑यः। जन्म॑न्। दे॒वाना॑म्। विशः॑। त्रि॒षु। आ॒। रो॒च॒ने। दि॒वः ॥६० ॥

Mantra without Swara
ताऽअस्य सूददोहसः सोमँ श्रीणन्ति पृश्नयः । जन्मन्देवानाँविशस्त्रिष्वा रोचने दिवः ॥

ताः। अस्य। सूददोहस इति सूदऽदोहसः। सोमम्। श्रीणन्ति। पृश्नयः। जन्मन्। देवानाम्। विशः। त्रिषु। आ। रोचने। दिवः॥६०॥

Yajurveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

हिन्दी
Yajurveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar) - हिन्दी
Meaning
१. उल्लिखित मन्त्र में वर्णित प्रकार के (ताः) = वे व्यक्ति (अस्य) = इस प्रभु के होते हैं, दैवी वृत्तिवाले बनकर प्रभु-प्राप्ति के मार्ग पर चल रहे होते हैं । २. जो (सूददोहस:) = [षूद क्षरणे throw away, दुह प्रपूरणे] दोषों को दूर फेंकनेवाले तथा गुणों का अपने में पूरण करनेवाले होते हैं । ३. इसी उद्देश्य से ये (सोमं श्रीणन्ति) = अपने में वीर्यशक्ति का परिपाक करते हैं। इस शक्ति के परिपाक के लिए ही ये २४, ४४ व ४८ वर्ष तक ब्रह्मचर्य का पालन करते हैं। ४. और (पृश्नयः) = ज्ञान की दीप्तियों का अपने से संस्पर्श करनेवाले होते हैं। [संस्पृष्टा भासाम् - नि०] ५. (देवानां जन्मन्ये) = देवों के जन्म में स्थित होते हैं, अर्थात् अपने जीवन में अधिकाधिक दिव्य गुणों को उत्पन्न करनेवाले होते हैं । ६. (त्रिषु विश:) = कर्म-उपासना व ज्ञान में प्रवेशवाले होते हैं अथवा धर्मार्थकाम तीनों का समरूप से सेवन करनेवाले होते हैं। ७. (दिवः आरोचने) = ज्ञान की दीप्ति में पूर्णरूप से स्थित होते हैं। अपने जीवन को ज्ञानोज्ज्वल बनाते हैं। इनके व्यवहार में कहीं भी मूर्खता नहीं टपकती। इसी से इनका नाम ही 'प्रियमेधा' [जिनको बुद्धि प्रिय है] हो जाता है।
Essence
भावार्थ- जो प्रभु के उपासक होते हैं वे १. अवगुणों को दूर करके गुणों का ग्रहण करते हैं। २. अपनी वीर्यशक्ति को संयमी जीवन से परिपक्व बनाते हैं। ३. ज्ञान- रश्मियों से सूर्य की भाँति चमकनेवाले बनते हैं । ४. दिव्य गुणों को धारण करके धर्मार्थकाम का समान रूप से सेवन करते हैं । ५. सदा ज्ञान के प्रकाश में रहते हैं।
Subject
सूद-दोहस