Yajurveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

Yajurveda Adhyay 15 / Mantra 32

65 Mantra
15/32
Devata- अग्निर्देवता Rishi- परमेष्ठी ऋषिः Chhand- विराड् बृहती Swara- मध्यमः
Mantra with Swara
ए॒ना वो॑ऽअ॒ग्निं नम॑सो॒र्जो नपा॑त॒माहु॑वे। प्रि॒यं चेति॑ष्ठमर॒तिꣳस्व॑ध्व॒रं विश्व॑स्य दू॒तम॒मृत॑म्॥३२॥

ए॒ना। वः॒। अ॒ग्निम्। नम॑सा। ऊ॒र्जः। नपा॑तम्। आ। हु॒वे॒। प्रि॒यम्। चेति॑ष्ठम्। अ॒र॒तिम्। स्व॒ध्व॒रमिति॑ सुऽअ॒ध्व॒रम्। विश्व॑स्य। दू॒तम्। अ॒मृत॑म् ॥३२ ॥

Mantra without Swara
एना वोऽअग्निन्नमसोर्जा नपातमा हुवे । प्रियञ्चेतिष्ठमरतिँ स्वध्वरँ विश्वस्य दूतममृतम् ॥

एना। वः। अग्निम्। नमसा। ऊर्जः। नपातम्। आ। हुवे। प्रियम्। चेतिष्ठम्। अरतिम्। स्वध्वरमिति सुऽअध्वरम्। विश्वस्य। दूतम्। अमृतम्॥३२॥

Yajurveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

हिन्दी
Yajurveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar) - हिन्दी
Meaning
१. (एना नमसा) = इस नमन के द्वारा आहुवे मैं पुकारता हूँ। नम्र हुआ मैं नतमस्तक होकर उस प्रभु की प्रार्थना करता हूँ जो २. (वः अग्निम्) = तुम सबको आगे ले चलनेवाले हैं। । ३. (ऊर्जो नपातम्) = शक्ति को नष्ट न होने देनेवाले हैं। ४. (प्रियम्) = प्रीणित करनेवाले हैं, जिनको पाकर जीव एक तृप्तिकर आनन्द का अनुभव करता है। ५. (चेतिष्ठम्) = अतिशयेन ज्ञान-सम्पन्न हैं और अपने उपासकों को ज्ञान देनेवाले हैं। ६. (अरतिम्) = [रति: उपरमः तद्रहितम् - म०] सदा उद्योगयुक्त हैं 'स्वाभाविकी ज्ञानबलक्रिया च ' जिनकी क्रिया स्वाभाविक है । ७. (स्वध्वरम्) = उत्तम यज्ञोंवाले हैं। जीवों से किये जानेवाले सब यज्ञ उस प्रभु की कृपा से ही सिद्ध होते हैं। ८. (विश्वस्य दूतम्) = सबके प्रेरक है [messenger] अथवा सबके दोषों को दूर करनेवाले तथा धर्मार्थमोक्ष को प्राप्त करानेवाले हैं। [यो दोषान् दुनोति दूरीकरोति धर्मार्थमोक्षान् प्रापयति वा द० ६।१५।९] जो अविद्या के पार ले जानेवाले हैं [ऋ० ३।१२।२ अविद्यायाः पारे गमयिता] अथवा सब दुःखों का निवारण करनेवाले हैं। [दूतः वारयते : - नि० ५1१] ९. (अमृतम्) = वे प्रभु अमृत हैं। उनको पाकर मनुष्य मृत्यु से ऊपर उठ जाता है।
Essence
भावार्थ- वे प्रभु हमें आगे ले चलते हैं, हमें अक्षीण शक्ति बनाते हैं, प्रीति को देनेवाले हैं, सर्वाधिक ज्ञानवाले हैं, सदा सहायता के लिए उद्यत हैं, हमारे सब यज्ञ उन्हीं की कृपा से पूर्ण होते हैं, सब कष्टों व अज्ञानों को दूर करनेवाले व अमर हैं। हम उन्हीं को पुकारें ।
Subject
ऊर्जो नपात् व चेतिष्ठ