Yajurveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

Yajurveda Adhyay 13 / Mantra 36

58 Mantra
13/36
Devata- अग्निर्देवता Rishi- भरद्वाज ऋषिः Chhand- निचृद्गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
अग्ने॑ यु॒क्ष्वा हि ये तवाश्वा॑सो देव सा॒धवः॑। अरं॒ वह॑न्ति म॒न्यवे॑॥३६॥

अग्ने॑। यु॒क्ष्व। हि। ये। तव॑। अश्वा॑सः। दे॒व॒। सा॒धवः॑। अर॑म्। वह॑न्ति। म॒न्यवे॑ ॥३६ ॥

Mantra without Swara
अग्ने युक्ष्वा हि ये तवाश्वासो देव साधवः । अरँ वहन्ति मन्यवे ॥

अग्ने। युक्ष्व। हि। ये । तव। अश्वासः। देव। साधवः। अरम्। वहन्ति। मन्यवे॥३६॥

Yajurveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

हिन्दी
Yajurveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar) - हिन्दी
Meaning
अग्ने॑ यु॒क्ष्वा हि ये तवाश्वा॑सो देव सा॒धवः॑ । आ॒र॒ वह॑न्ति म॒न्यवे॑ ॥३६॥ १. गत मन्त्र के अनुसार मनुष्य 'स्वराट् ' = जितेन्द्रिय बनकर शक्तिशाली बनता है और प्रस्तुत मन्त्र का ऋषि 'भारद्वाज' होता है-अपने में शक्ति को भरनेवाला। यह प्रभु से प्रार्थना करता है कि हे अग्ने-हमें आगे ले चलनेवाले प्रभो! (देव) = हे दिव्य गुणों के पुञ्ज प्रभो! आप कृपा करके हमारे इस शरीररूप रथ में (हि) = निश्चय से (युक्ष्व) = उन घोड़ों-इन्द्रियरूप अश्वों को-जोतिए। (ये तव अश्वासः) = जो आपके घोड़े-अश्व हैं, [अश् व्याप्तौ ], निरन्तर यज्ञादि उत्तम कर्मों में व्याप्त होनेवाले हैं । २. (साधवः) [साध्नुवन्ति परकार्याणि] = जो सदा उत्कृष्ट कार्यों को अथवा परार्थ को सिद्ध करनेवाले हैं। जो स्वार्थ के कारण दूसरों के हित का ध्वंस नहीं करते। ३. (अरम्) = [अलं - अत्यर्थम्] जो खूब ही (वहन्ति) = शरीररूप रथ को ले-चलते हैं, जो थकते नहीं । ४. और इस प्रकार निरन्तर अपने-अपने कार्य में लगे हुए (मन्यवे) = [दीप्तये-उ० ] ज्ञान की दीप्ति के लिए प्रयत्नशील होते हैं अथवा [यज्ञाय - म० ] यज्ञों को सिद्ध करनेवाले होते हैं। ज्ञानेन्द्रियाँ ज्ञान प्राप्त कराएँ और कर्मेन्द्रियाँ यज्ञादि उत्तम कार्यों में लगी रहें। ५. निरन्तर कर्मों में लगी हुई ये इन्द्रियाँ उसे शक्तिशाली बनाती हैं और ज्ञानेन्द्रियाँ उसके अन्दर ज्ञान का वर्धन करती हैं। 'वाज' के शक्ति व ज्ञान दोनों ही अर्थ हैं, अतः ये इन्द्रियाँ इसे शक्ति व ज्ञान- सम्पन्न करके सचमुच 'भारद्वाज' बना देती हैं।
Essence
भावार्थ - हमारी इन्द्रियाँ कर्मों में व्याप्त होनेवाली, परहित को सिद्ध करनेवाली, अनथक कार्य करनेवाली तथा हमें ज्ञान दीप्ति व यज्ञादि उत्तम कर्मों को प्राप्त करानेवाली हों।
Subject
अश्वासः - मन्यवे