Yajurveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

Yajurveda Adhyay 13 / Mantra 23

58 Mantra
13/23
Devata- बृहस्पतिर्देवता Rishi- इन्द्राग्नी ऋषी Chhand- अनुष्टुप् Swara- गान्धारः
Mantra with Swara
या वो॑ देवाः॒ सूर्य्ये॒ रुचो॒ गोष्वश्वे॑षु॒ या रुचः॑। इन्द्रा॑ग्नी॒ ताभिः॒ सर्वा॑भी॒ रुचं॑ नो धत्त बृहस्पते॥२३॥

याः। वः॒। दे॒वाः॒। सूर्ये॑। रुचः॑। गोषु॑। अश्वे॑षु। याः। रुचः॑। इन्द्रा॑ग्नी॒ऽइतीन्द्रा॑ग्नी। ताभिः॑। सर्वा॑भिः। रुच॑म्। नः॒। ध॒त्त॒। बृ॒ह॒स्प॒ते॒ ॥२३ ॥

Mantra without Swara
या वो देवाः सूर्ये रुचो गोष्वश्वेषु या रुचः । इन्द्राग्नी ताभिः सर्वाभी रुचन्नो धत्त बृहस्पते ॥

याः। वः। देवाः। सूर्ये। रुचः। गोषु। अश्वेषु। याः। रुचः। इन्द्राग्नीऽइतीन्द्राग्नी। ताभिः। सर्वाभिः। रुचम्। नः। धत्त। बृहस्पते॥२३॥

Yajurveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

हिन्दी
Yajurveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar) - हिन्दी
Meaning
१. मातृमान् पितृमान् आचार्यवान् पुरुषो वेद' इस वाक्य के अनुसार उत्तम सन्तानों का निर्माण माता-पिता व आचार्य पर निर्भर करता है। ये तीनों देव हैं 'मातृदेवो भव, पितृदेवो भव, आचार्यदेवो भव' इस उपनिषद् वाक्य में तीनों को देव कहा गया है। इनका मस्तिष्क ज्ञान के सूर्य से चमकता होगा और इनकी ज्ञानेन्द्रियाँ व कर्मेन्द्रियाँ अपनी-अपनी शक्तियों से चमकती होंगी तो सन्तानें भी उत्तम होंगी । २. मन्त्र के शब्दों में कहते हैं कि हे (देवा:) = माता-पिता व आचार्यो ! (या:) = जो (वः) = आपकी सूर्ये मस्तिष्करूप गगन में उदित ज्ञानसूर्य में (रुचः) = दीप्तियाँ हैं, गोषु ज्ञानेन्द्रियों में, अश्वेषु कर्मों में व्याप्त होनेवाली कर्मेन्द्रियों में (या:) = जो (रुचः) = दीप्तियाँ हैं, हे (इन्द्राग्नी) = इन्द्रतुल्य अथवा जितेन्द्रिय पितः तथा अग्नितुल्य मातः! तथा (बृहस्पते) = वेदज्ञान के पति आचार्य ! (ताभिः सर्वाभी:)- उन सब दीप्तियों से (नः) = हम सन्तानों में भी (रुचम्) = दीप्ति को (धत्त) = धारण करो। हमारे जीवनों को भी दीप्तिमय बनाओ। ३. माता-पिता व आचार्य ने ही तो सन्तानों का निर्माण करना है। माता चरित्र देती है, पिता शिष्टाचार तथा आचार्य ज्ञान ।
Essence
भावार्थ- माता-पिता व आचार्य जब उत्तम मस्तिष्क, ज्ञानेन्द्रियों व कर्मेन्द्रियोंवाले होते हैं तब वे सन्तानों के जीवनों को भी ज्योतिर्मय बना पाते हैं।
Subject
माता-पिता व आचार्य