Yajurveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

Yajurveda Adhyay 13 / Mantra 18

58 Mantra
13/18
Devata- अग्निर्देवता Rishi- त्रिशिरा ऋषिः Chhand- प्रस्तारपङ्क्तिः Swara- पञ्चमः
Mantra with Swara
भूर॑सि॒ भूमि॑र॒स्यदि॑तिरसि वि॒श्वधा॑या॒ विश्व॑स्य॒ भुव॑नस्य ध॒र्त्री। पृ॒थि॒वीं य॑च्छ पृथि॒वीं दृ॑ꣳह पृथि॒वीं मा हि॑ꣳसीः॥१८॥

भूः। अ॒सि॒। भूमिः॑। अ॒सि॒। अदि॑तिः। अ॒सि॒। वि॒श्वधा॑या॒ इति॑ वि॒श्वऽधायाः॑। विश्व॑स्य। भुव॑नस्य। ध॒र्त्री। पृ॒थि॒वीम्। य॒च्छ॒। पृ॒थि॒वीम्। दृ॒ꣳह॒। पृ॒थि॒वीम्। मा। हि॒ꣳसीः॒ ॥१८ ॥

Mantra without Swara
भूरसि भूमिरस्यदितिरसि विश्वधाया विश्वस्य भुवनस्य धर्त्री । पृथिवीँ यच्छ पृथिवीन्दृँह पृथिवीम्मा हिँसीः ॥

भूः। असि। भूमिः। असि। अदितिः। असि। विश्वधाया इति विश्वऽधायाः। विश्वस्य। भुवनस्य। धर्त्री। पृथिवीम्। यच्छ। पृथिवीम्। दृꣳह। पृथिवीम्। मा। हिꣳसीः॥१८॥

Yajurveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

हिन्दी
Yajurveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar) - हिन्दी
Meaning
१. पत्नी के लिए ही कहते हैं कि (भूः असि) = [ भवन्ति यस्याम्] तुझसे ही सन्तानों का जन्म होता है। २. (भूमि: असि) = [ भवन्ति यस्याम्] उत्पन्न होकर सन्तान तेरे ही आधार से रहते हैं । ३. (अदितिः असि) = [अविद्यमानादितिः खण्डनं यया] तेरे कारण ही सन्तान अखण्डित स्वास्थ्य व चारित्र्यवाली बनती है। ४. तू (विश्वधायाः) = सब सन्तानों को उत्तम दूध पिलानेवाली है और इस प्रकार सबका पालन करनेवाली है। ५. (विश्वस्य भुवनस्य धर्त्री) = सन्तान के निर्माण व पालन के द्वारा तू सारे लोक का धारण करनेवाली है। जिस भी राष्ट्र में माताएँ अपने सन्तानों को अदीन व दिव्य गुणोंवाला तथा स्वस्थ शरीरवाला बनाती हैं, वह राष्ट्र सदा उन्नत होता है। ६. एक देवमाता-दिव्य सन्तान का निर्माण करनेवाली माता को चाहिए कि वह (पृथिवीं यच्छ) = [पृथिवी शरीरम् ] अपने शरीर का नियमन करे । (पृथिवीं दृंह)= इस शरीर को दृढ़ बनाये और (पृथिवीम्) = शरीर को मा हिंसी:- हिंसित न होने दे। नियमित जीवन से शरीर दृढ़ होगा और असमय में समाप्त न हो जाएगा। वस्तुत: यह 'नियमन, दृढ़ीकरण व अहिंसन' ही 'त्रिशिरा ' बनना है, त्रिविध उन्नति करना है।
Essence
भावार्थ-एक माता अदिति' बनकर दिव्य सन्तानों को जन्म दे। इस प्रकार वह राष्ट्र का धारण कर सकती है। उसे अपने शरीर को व्यवस्थित, दृढ़ व स्वस्थ बनाना है। अव्यवस्थित, ढीली-ढाली व अस्वस्थ माता तो ऐसी ही सन्तानों को जन्म देगी जो राष्ट्र के लिए बोझ ही होंगे।
Subject
विश्वधाया