Yajurveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

Yajurveda Adhyay 12 / Mantra 99

117 Mantra
12/99
Devata- ओषधिर्देवता Rishi- वरुण ऋषिः Chhand- विराडनुष्टुप् Swara- गान्धारः
Mantra with Swara
सह॑स्व मे॒ऽअरा॑तीः॒ सह॑स्व पृतनाय॒तः। सह॑स्व॒ सर्वं॑ पा॒प्मान॒ꣳ सह॑मानास्योषधे॥९९॥

सह॑स्व। मे॒। अरा॑तीः। सह॑स्व। पृ॒त॒ना॒य॒त इति॑ पृतनाऽय॒तः। सह॑स्व। सर्व॑म्। पा॒प्मान॑म्। सह॑माना। अ॒सि॒। ओ॒ष॒धे॒ ॥९९ ॥

Mantra without Swara
सहस्व मे अरातीः सहस्व पृतनायतः । सहस्व सर्वम्पाप्मानँ सहमानास्योषधे ॥

सहस्व। मे। अरातीः। सहस्व। पृतनायत इति पृतनाऽयतः। सहस्व। सर्वम्। पाप्मानम्। सहमाना। असि। ओषधे॥९९॥

Yajurveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

हिन्दी
Yajurveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar) - हिन्दी
Meaning
१. हे (ओषधे) = दोषों का दहन करनेवाली [उष दाहे] ओषधे ! (मे) = मेरे (अरातीः) = शत्रुभूत रोगों को (सहस्व) = तू पराभूत कर । इन्हें मेरे शरीर पर आधिपत्य न जमाने दे। २. (पृतनायतः) = सेना की भाँति आचरण करनेवाले, अर्थात् जैसे सेना अपने शत्रुओं पर आक्रमण करती है उसी प्रकार मुझपर आक्रमण करनेवाले इन रोगों को (सहस्व) = मसल डाल [ षह मर्षणे ] । २. इस प्रकार मेरे शरीर से सब रोगों को दूर करके मन में रहनेवाले (सर्वं पाप्मानम्) = सारे पापों को अथवा सब अशुभवृत्तियों को (सहस्व) = कुचल डाल । इन ओषधियों से शरीर की व्याधियाँ तो दूर हों ही, ये आन्तरिक - मन में रहनेवाली आधियों को भी समाप्त कर दें। ३. हे ओषधे ! तू सहमाना (असि) = है ही रोगों का पराभव करनेवाली ।
Essence
भावार्थ - ओषधियाँ शत्रुरूप रोगों को नष्ट करती हैं, उनपर आक्रमण करनेवाली होती हैं।
Subject
सहमाना