Yajurveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

Yajurveda Adhyay 12 / Mantra 81

117 Mantra
12/81
Devata- वैद्यो देवता Rishi- भिषगृषिः Chhand- अनुष्टुप् Swara- गान्धारः
Mantra with Swara
अ॒श्वा॒व॒ती सो॑माव॒तीमू॒र्जय॑न्ती॒मुदो॑जसम्। आवि॑त्सि॒ सर्वा॒ऽओष॑धीर॒स्माऽअ॑रि॒ष्टता॑तये॥८१॥

अ॒श्वा॒व॒तीम्। अ॒श्वा॒व॒तीमित्य॑श्वऽव॒तीम्। सो॒मा॒व॒तीम्। सो॒म॒व॒तीमिति॑ सो॑मऽव॒तीम्। ऊ॒र्जय॑न्तीम्। उदो॑जस॒मित्युत्ऽओ॑जसम्। आ। अ॒वि॒त्सि॒। सर्वाः॑। ओष॑धीः। अ॒स्मै। अ॒रि॒ष्टता॑तय॒ इत्य॑रि॒ष्टऽता॑तये ॥८१ ॥

Mantra without Swara
अश्वावतीँ सोमावतीमूर्जयन्तीमुदोजसम् । आवित्सि सर्वा ओषधीरस्मा अरिष्टतातये ॥

अश्वावतीम्। अश्वावतीमित्यश्वऽवतीम्। सोमावतीम्। सोमवतीमिति सोमऽवतीम्। ऊर्जयन्तीम्। उदोजसमित्युत्ऽओजसम्। आ। अवित्सि। सर्वाः। ओषधीः। अस्मै। अरिष्टतातय इत्यरिष्टऽतातये॥८१॥

Yajurveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

हिन्दी
Yajurveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar) - हिन्दी
Meaning
१. गत मन्त्र का वैद्य कहता है कि मैं (अश्वावतीम्) = शक्ति देनेवाली ['अश्व' शब्द शक्ति का प्रतीक है], जो ओषधि मनुष्य को शक्ति सम्पन्न बनाती है, उसको (आवित्सि) = अच्छी प्रकार जानता हूँ। २. (सोमावतीम्) = सौम्य रसों से युक्त, सोमरसवाली, जो मनुष्य की उत्तेजना व तिलमिलाहट को कम करती है उन ओषधियों को भी जानता हूँ। ३. मैं (ऊर्जयन्तीम्) = [ऊर्ज बलप्राणनयोः] बल व प्राणशक्ति को देनेवाली ओषधियों को जानता हूँ। ४. (उदोजसम्) = उद्गत ओजवाली ओषधियों को भी जानता हूँ। ५. इस प्रकार इन चार गुणों से युक्त (सर्वाः ओषधी:) = सब ओषधियों को (अस्मै) = इस पुरुष के लिए (अरिष्ट तातये) = रोग के विनाश के लिए-अहिंसा के लिए प्राप्त कराता हूँ। ६. ओषधियों के चार मुख्य गुण हैं- ये [क] पुरुष = को शक्तिशाली बनाती हैं, [ख] घबराहट को दूर कर शान्त करती हैं, [ग] बल और प्राणशक्ति सम्पन्न हैं, [घ] मनुष्य को ओजस्वी बनाती हैं । ६. वैद्य को इस प्रकार की सब ओषधियों को जानना व रखना है, तभी वह यथास्थान सबका प्रयोग करके रोगी को व्याधि का शिकार होने से बचा सकेगा।
Essence
भावार्थ- वैद्य सब ओषधियों को जाने और उनके ठीक प्रयोग से रोगी को सुखी करे ।
Subject
चतुर्विधं भेषजम्