Yajurveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

Yajurveda Adhyay 12 / Mantra 74

117 Mantra
12/74
Devata- अश्विनौ देवते Rishi- कुमारहारित ऋषिः Chhand- आर्षी जगती Swara- निषादः
Mantra with Swara
स॒जूरब्दो॒ऽअय॑वोभिः स॒जूरु॒षाऽअरु॑णीभिः। स॒जोष॑साव॒श्विना॒ दꣳसो॑भिः स॒जूः सूर॒ऽएत॑शेन स॒जूर्वै॑श्वान॒रऽइड॑या घृ॒तेन॒ स्वाहा॑॥७४॥

स॒जूरिति॑ स॒ऽजूः। अब्दः॑। अय॑वोभि॒रित्यय॑वःऽभिः। स॒जूरिति॑ स॒ऽजूः। उ॒षाः। अरु॑णीभिः। स॒जोष॑सा॒विति॑ स॒जोष॑ऽसौ। अ॒श्विना॑। दꣳसो॑भि॒रिति॒ दꣳसः॑ऽभिः। स॒जूरिति॑ स॒ऽजूः। सूरः॑। एत॑शेन। स॒जूरिति॑ स॒ऽजूः। वै॒श्वा॒न॒रः। इड॑या। घृ॒तेन॑। स्वाहा॑ ॥७४ ॥

Mantra without Swara
सजूरब्दोऽअयवोभिः सजूरुषा अरुणीभिः सजोषसावश्विना दँसोभिः सजूः सूरऽएतशेन सजूर्वैश्वानरऽइडया घृतेन स्वाहा ॥

सजूरिति सऽजूः। अब्दः। अयवोभिरित्ययवःऽभिः। सजूरिति सऽजूः। उषाः। अरुणीभिः। सजोषसाविति सजोषऽसौ। अश्विना। दꣳसोभिरिति दꣳसःऽभिः। सजूरिति सऽजूः। सूरः। एतशेन। सजूरिति सऽजूः। वैश्वानरः। इडया। घृतेन। स्वाहा॥७४॥

Yajurveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

हिन्दी
Yajurveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar) - हिन्दी
Meaning
१. हे प्रभो ! (अब्द:) = वर्ष (अयवोभिः) = न विच्छिन्न होनेवाले काल-अवयवों से अथवा शुक्लपक्ष और कृष्णपक्ष से (सजू:) = संयुक्त हो। हमारे जीवन में यह काल विच्छिन्नावयव न हो जाए। हमारा आयुष्य अविच्छिन्नरूप से चलता चले। २. हमारे लिए प्रतिदिन (उषाः) = उषाकाल (अरुणीभिः) = अरुणवर्ण किरणों से (सजू:) = संयुक्त हो। हम अरुण किरणोंवाली उषा का प्रतिदिन दर्शन करें। ३. (अश्विना) = हमारे प्राणापान (दंसोभिः) = उत्तम कर्मों से (सजोषसौ) = प्रीतियुक्त हों। हम अपनी प्राणशक्ति से उत्तम कर्मों में आनन्द का अनुभव करें ४. (सूरः) = सूर्य (एतशेन) = अपने किरणरूप अश्वों से (सजूः) = युक्त हो। हम सदा सूर्य किरणों का सेवन करनेवाले बनें। सूर्यकिरणें हमारे लिए सदा स्वास्थ्य व गतिशीलता देनेवाली हों। ५. (वैश्वानरे) = हमारी जाठराग्नि (इडया) = अन्न से (सजू:) = युक्त हो इस (वैश्वानरे) = वैश्वानर अग्नि में (घृतेन स्वाहा) = घृत से उत्तम आहुति दी जाए, अर्थात् घृत के [ तौलस्य प्राशान] मपे-तुले प्रयोग से जाठराग्नि को दीप्त किया जाए। वैश्वानराग्नि [ जाठराग्नि] का भोजन अन्न व घृत ही हैं। इसमें मद्य-मांस की आहुति न पड़े।
Essence
भावार्थ- हमारे जीवन के वर्ष अविच्छिन्न कालावयवोंवाले हों। हम उषा के प्रकाश का प्रतिदिन दर्शन करें। हमारे प्राणापान प्रीतिपूर्वक कर्मों में लगे रहें। हम ज्ञानी बनकर क्रियाशील हों, हम खाने में अन्न व घृत का प्रयोग करें।
Subject
अन्न व घृत