Yajurveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

Yajurveda Adhyay 12 / Mantra 34

117 Mantra
12/34
Devata- अग्निर्देवता Rishi- वसिष्ठ ऋषिः Chhand- आर्षी त्रिष्टुप् Swara- धैवतः
Mantra with Swara
प्रप्रा॒यम॒ग्निर्भ॑र॒तस्य॑ शृण्वे॒ वि यत्सूर्यो॒ न रोच॑ते बृहद्भाः। अ॒भि यः पू॒रुं पृत॑नासु त॒स्थौ दी॒दाय॒ दै॒व्यो॒ऽअति॑थिः शि॒वो नः॑॥३४॥

प्रप्रेति॒ प्रऽप्र॑। अ॒यम्। अ॒ग्निः। भ॒र॒तस्य॑। शृ॒ण्वे॒। वि। यत्। सूर्य्यः॑। न। रोच॑ते। बृ॒हत्। भाः। अ॒भि। यः। पू॒रुम्। पृत॑नासु। त॒स्थौ। दी॒दाय॑। दैव्यः॑। अति॑थिः। शि॒वः। नः॒ ॥३४ ॥

Mantra without Swara
प्रप्रायमग्निर्भरतस्य शृण्वे वि यत्सूर्या न रोचते बृहद्भाः । अभि यः पूरुम्पृतनासु तस्थौ दीदाय दैव्योऽअतिथिः शिवो नः ॥

प्रप्रेति प्रऽप्र। अयम्। अग्निः। भरतस्य। शृण्वे। वि। यत्। सूर्य्यः। न। रोचते। बृहत्। भाः। अभि। यः। पूरुम्। पृतनासु। तस्थौ। दीदाय। दैव्यः। अतिथिः। शिवः। नः॥३४॥

Yajurveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

हिन्दी
Yajurveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar) - हिन्दी
Meaning
१. पिछले मन्त्र में प्रभु की मेघ-गर्जना का उल्लेख था। ( भरतस्य ) = सारे ब्रह्माण्ड का भरण करनेवाले प्रभु की इस गर्जना को ( अयं अग्निः ) = यह उन्नतिशील जीव ( शृण्वे ) = सुनता है और ( प्रप्र ) = निरन्तर आगे बढ़ता चलता है। उस वाणी को सुनेंगे तो उन्नति क्यों न होगी ? २. इस वाणी को सुननेवाले की पहचान यह है ( यत् ) = कि यह ( सूर्यः न ) = सूर्य की भाँति ( विरोचते ) = विशिष्ट दीप्तिवाला होता है। ( बृहद्भाः ) = वृद्धिशील ज्ञानवाला होता है। ३. उसी ने वाणी सुनी है ( यः ) = जो ( पृतनासु ) = संग्रामों में ( पूरुम् ) = सबको व्याप्त करनेवाले, अत्यन्त प्रबल कामासुर का ( अभितस्थौ ) = मुक़ाबला करता है, अर्थात् प्रभु की वाणी को सुननेवाला काम पर विजय पाता है। ४. ( दीदाय ) = यह स्वास्थ्य की दीप्तिवाला होता है। ५. ( दैव्यः ) = प्रभु के साथ सम्बन्धवाला होने से दिव्य गुणों से परिपूर्ण होता है। ६. ( अतिथिः ) = [ अत सातत्यगमने ] निरन्तर गतिशील होता है और ७. ( नः ) = हमारे लिए ( शिवः ) = कल्याणकर होता है।
Essence
भावार्थ — प्रभु की वाणी के सुनने पर मनुष्य ज्ञान-सूर्य से चमकता है, काम पर विजय पाता है, स्वस्थ, दिव्य गुणोंवाला, निरन्तर क्रियाशील व सभी का कल्याण करनेवाला होता है। काम पर विजय पानेवाला यह ‘वशिष्ठ’ कहलाता है—वशियों में श्रेष्ठ।
Subject
सुननेवाला