Yajurveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

Yajurveda Adhyay 12 / Mantra 25

117 Mantra
12/25
Devata- अग्निर्देवता Rishi- वत्सप्रीर्ऋषिः Chhand- भुरिक्पङ्क्तिः Swara- पञ्चमः
Mantra with Swara
दृ॒शा॒नो रु॒क्मऽउ॒र्व्या व्य॑द्यौद् दु॒र्मर्ष॒मायुः॑ श्रि॒ये रु॑चा॒नः। अ॒ग्निर॒मृतो॑ऽअभव॒द् वयो॑भि॒र्यदे॑नं॒ द्यौरज॑नयत् सु॒रेताः॑॥२५॥

दृ॒शा॒नः। रु॒क्मः। उ॒र्व्या। वि। अ॒द्यौ॒त्। दु॒र्मर्ष॒मिति॑ दुः॒ऽमर्ष॑म्। आयुः॑। श्रि॒ये। रु॒चा॒नः। अ॒ग्निः। अ॒मृतः॑। अ॒भ॒व॒त्। वयो॑भि॒रिति॒ वयः॑ऽभिः। यत्। ए॒न॒म्। द्यौः। अज॑नयत्। सु॒रेता॒ इति॑ सु॒ऽरेताः॑ ॥२५ ॥

Mantra without Swara
दृशानो रुक्म उर्व्या व्यद्यौद्दुर्मर्षमायुः श्रिये रुचानः । अग्निरमृतोऽअभवद्वयोभिर्यदेनन्द्यौर्जनयत्सुरेताः ॥

दृशानः। रुक्मः। उर्व्या। वि। अद्यौत्। दुर्मर्षमिति दुःऽमर्षम्। आयुः। श्रिये। रुचानः। अग्निः। अमृतः। अभवत्। वयोभिरिति वयःऽभिः। यत्। एनम्। द्यौः। अजनयत्। सुरेता इति सुऽरेताः॥२५॥

Yajurveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

हिन्दी
Yajurveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar) - हिन्दी
Meaning
१. ( दृशानः ) = यह वस्तुतत्त्व को देखता है, बाह्य रूप से ही विचलित नहीं हो जाता—विषयों की आपातरमणीयता इसे उनमें उलझा नहीं देती, क्योंकि यह विषयों के विषयत्व को देखता है। २. ( रुक्मः ) = न उलझने के कारण ही चमकता है। ३. ( उर्व्या व्यद्यौत् ) = हृदय की विशालता से यह प्रकाशमय है— उत्तम व्यवहार करनेवाला होता है। ४. ( आयुः ) = इसका जीवन ( दुर्मर्षम् ) = वासनाओं से न कुचलने योग्य होता हैं ५. ( श्रिये रुचानः ) = यह श्री के लिए रुचिवाला होता है, अर्थात् प्रत्येक कार्य को शोभा से करता है ६. ( अग्निः ) = निरन्तर आगे बढ़नेवाला होता है ७. ( वयोभिः ) = उत्तम आयुष्यवर्धक अन्नों से ( अमृतः अभवत् ) = रोगाक्रान्त न होकर अमृत हो जाता है, अकालमृत्यु को प्राप्त नहीं होता। ८. ( यत् ) = क्योंकि ( सुरेताः ) = उत्तम रेतस्वाला अर्थात् ब्रह्मचारी ( द्यौः ) = प्रकाशमय जीवनवाला आचार्य ( एनम् ) = इसे ( अजनयत् ) = विकसित करता है—शक्तिमान् बनाता है।
Essence
भावार्थ — संसार में हमें तत्त्वदर्शी बनकर विषयों में नहीं उलझना। ज्ञानी, ब्रह्मचारी आचार्यों की कृपा से ही ऐसा जीवन बनता है।
Subject
दृशानो रुक्म