Yajurveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

Yajurveda Adhyay 12 / Mantra 117

117 Mantra
12/117
Devata- अग्निर्देवता Rishi- प्रजापतिर्ऋषिः Chhand- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
अ॒ग्निः प्रि॒येषु॒ धाम॑सु॒ कामो॑ भू॒तस्य॒ भव्य॑स्य। स॒म्राडेको॒ विरा॑जति॥११७॥

अ॒ग्निः। प्रि॒येषु॑। धाम॒स्विति॒ धाम॑ऽसु। कामः॑। भू॒तस्य॑। भव्य॑स्य। स॒म्राडिति॑ स॒म्ऽराट्। एकः॑। वि। रा॒ज॒ति॒ ॥११७ ॥

Mantra without Swara
अग्निः प्रियेषु धामसु कामो भूतस्य भव्यस्य । सम्राडेको वि राजति ॥

अग्निः। प्रियेषु। धामस्विति धामऽसु। कामः। भूतस्य। भव्यस्य। सम्राडिति सम्ऽराट्। एकः। वि। राजति॥११७॥

Yajurveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

हिन्दी
Yajurveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar) - हिन्दी
Meaning
१. गत मन्त्र का 'विरूप' आराधक प्रभु को सारे संसार के रक्षक के रूप में देखता है, अत: वह 'प्रजापति' हो जाता है। प्रजापति के रूप में यह प्रभु को देख रहा है। २. यह कहता है कि वह प्रभु ही ('अग्निः') = अग्रेणी हैं, सारे संसार को आगे और आगे ले चल रहे हैं। ३. (प्रियेषु धामसु) = प्रिय - प्रसन्न करनेवाले तेजों के लिए (काम:) = [काम्यते] वे चाहने योग्य हैं, अर्थात् प्रभु का आराधन करके हमें वह तेजस्विता प्राप्त होती है जो प्रिय-ही-प्रिय होती है। रक्षा के कार्यों में विनियुक्त होकर वह हमें संसार में यशस्वी बनानेवाली होती है। 'बाहुभ्यां यशोबलम्' यह प्रार्थना प्रभु के आराधन से ही पूर्ण होती है। ४. (भूतस्य भव्यस्य सम्राट्) = वे प्रभु भूत व भव्य के सम्राट् हैं, जो कुछ हो चुका है या होना है उसके शासक वे प्रभु ही हैं । ५. (एकः) = वे अद्वितीय हैं। वे अपने निर्माण, धारण, प्रलय व कर्मानुसार फल-व्यवस्थात्मक कार्यों में किसी की सहायता की अपेक्षा नहीं करते। ६. विराजति वे विशिष्टरूप से देदीप्यमान हैं और विशिष्ट रूप में ही सारे ब्रह्माण्ड - यन्त्र को नियमित गति दे रहे हैं [direct, regulate] उपनिषद् के शब्दों में सब नदियाँ उन्हीं के अनुशासन में बह रही हैं। सूर्य-चन्द्रादि उसी के अनुशासन में चमक रहे हैं। वे प्रभु ही सारे ब्रह्माण्ड व सारी प्रजाओं के पति हैं।
Essence
भावार्थ-वे प्रभु अग्नि हैं, प्रिय तेज को प्राप्त करनेवाले हैं, भूत- भव्य के सम्राट् हैं, अद्वितीय हैं और प्रजापति हैं- सूर्य-चन्द्रादि उसी के अनुशासन में गति कर रहे हैं
Subject
प्रजापतिः