Yajurveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

Yajurveda Adhyay 11 / Mantra 6

83 Mantra
11/6
Devata- सविता देवता Rishi- प्रजापतिर्ऋषिः Chhand- निचृज्जगती Swara- निषादः
Mantra with Swara
यस्य॑ प्र॒याण॒मन्व॒न्यऽइद्य॒युर्दे॒वा दे॒वस्य॑ महि॒मान॒मोज॑सा। यः पार्थि॑वानि विम॒मे सऽएत॑शो॒ रजा॑सि दे॒वः स॑वि॒ता म॑हित्व॒ना॥६॥

यस्य॑। प्र॒याण॑म्। प्र॒यान॒मिति॑ प्र॒ऽयान॑म्। अनु॑। अ॒न्ये। इत्। य॒युः। दे॒वाः। दे॒वस्य॑। म॒हि॒मान॑म्। ओज॑सा। यः। पार्थि॑वानि। वि॒म॒म इति॑ विऽम॒मे। सः। एत॑शः। रजा॑सि। दे॒वः। स॒वि॒ता। म॒हि॒त्व॒नेति॑ महिऽत्व॒ना ॥६ ॥

Mantra without Swara
यस्य प्रयाणमन्वन्यऽइद्ययुर्देवा देवस्य महिमानमोजसा । यः पार्थिवानि विममे सऽएतशो रजाँसि देवः सविता महित्वना ॥

यस्य। प्रयाणम्। प्रयानमिति प्रऽयानम्। अनु। अन्ये। इत्। ययुः। देवाः। देवस्य। महिमानम्। ओजसा। यः। पार्थिवानि। विमम इति विऽममे। सः। एतशः। रजासि। देवः। सविता। महित्वनेति महिऽत्वना॥६॥

Yajurveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

हिन्दी
Yajurveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar) - हिन्दी
Meaning
१. ( यस्य देवस्य ) = जिस देव के ( प्रयाणम् अनु ) = प्रयाण के निर्देशानुसार ( अन्ये देवाः ) =  अन्य सब देव ( इत् ) = निश्चय से ( ययुः ) = चलते हैं। प्रभु ने इन देवों का जो भी मार्ग निश्चित किया है उसी मार्ग पर ये सब निरन्तर चल रहे हैं। 

२. ( यस्य ओजसा ) = जिस देव के ओज से ( अन्ये देवाः ) = दूसरे सब देव ( महिमानम् ) = महिमा को ( ययुः ) = प्राप्त होते हैं। ‘प्रभास्मि शशिसूर्ययोः’ इत्यादि वाक्यों के अनुसार सूर्य और चन्द्रमा आदि को उस प्रभु से ही प्रभा प्राप्त हुई है। ‘तस्य भासा सर्वमिदं विभाति’ = उसी की चमक से सब पदार्थ चमक रहे हैं। जहाँ कहीं भी विभूति, श्री, व ऊर्ज् है यह सब उस महान् देव का ही अंश है। ‘तेन देवा देवतामग्र आयन्’ = देवों को देवत्व प्रभु से ही प्राप्त हुआ है। 

३. ( यः सविता देवः ) = जो सबका उत्पादक देव ( महित्वना ) = अपनी महिमा से ( पार्थिवानि रजांसि ) = इन सब पार्थिव लोकों को ( विममे ) = विशेष माप से बनाता है। 

४. ( सः ) = वही देव ( एतशः ) = [ एतानि शेते ] इन सब लोकों में निवास कर रहा है। उसके निवास से ही सब लोकों का धारण हो रहा है। सूर्यादि में प्रभु का निवास न हो तो वे एक बुझे कोयले की भाँति ही लगेंगे।
Essence
भावार्थ — १. प्रभु के प्रशासन में ही सब देव गति कर रहे हैं। २. उसके ओज से ही ये महिमावाले हो रहे हैं। ३. वही इन सबका निर्माण करते हैं। ४. वही इनका धारण करनेवाले हैं।
Subject
प्रभु-स्तुति