Yajurveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

Yajurveda Adhyay 11 / Mantra 59

83 Mantra
11/59
Devata- अदितिर्देवता Rishi- सिन्धुद्वीप ऋषिः Chhand- आर्षी त्रिष्टुप् Swara- धैवतः
Mantra with Swara
अदि॑त्यै॒ रास्ना॒स्यदि॑तिष्टे॒ बिलं॑ गृभ्णातु। कृ॒त्वाय॒ सा म॒हीमु॒खां मृ॒न्मयीं॒ योनि॑म॒ग्नये॑। पु॒त्रेभ्यः॒ प्राय॑च्छ॒ददि॑तिः श्र॒पया॒निति॑॥५९॥

अदि॑त्यै। रास्ना॑। अ॒सि॒। अदि॑तिः। ते॒। बिल॑म्। गृ॒भ्णा॒तु॒। कृ॒त्वाय॑। सा। म॒हीम्। उ॒खाम्। मृ॒न्मयी॒मिति॑ मृ॒त्ऽमयी॑म्। योनि॑म्। अ॒ग्नये॑। पु॒त्रेभ्यः॑। प्र। अ॒य॒च्छ॒त्। अदि॑तिः। श्र॒पया॑न्। इति॑ ॥५९ ॥

Mantra without Swara
अदित्यै राम्नासिस्यदितिष्टे बिलङ्गृभ्णातु । कृत्वाय सा महीमुखाम्मृन्मयीँयोनिमग्नये । पुत्रेभ्यः प्रायच्छददितिः श्रपयानिति ॥

अदित्यै। रास्ना। असि। अदितिः। ते। बिलम्। गृभ्णातु। कृत्वाय। सा। महीम्। उखाम्। मृन्मयीमिति मृत्ऽमयीम्। योनिम्। अग्नये। पुत्रेभ्यः। प्र। अयच्छत्। अदितिः। श्रपयान्। इति॥५९॥

Yajurveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

हिन्दी
Yajurveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar) - हिन्दी
Meaning
१. हे पत्नि! तू ( अदित्यै ) = अदिति के लिए ( रास्ना ) = मेखला है, अर्थात् अदिति बनने के लिए कटिबद्ध है। तुझे ‘अदीना देवमाता’ बनना है, सब प्रकार की दीनताओं से ऊपर दिव्य गुणों का निर्माण करनेवाली बनना है। २. अब पिता सन्तान से कहता है कि ( अदितिः ) = यह अदीना देवमाता ( ते ) = तेरे ( बिलम् ) = [ भरण—द० ] भरण-पोषण को ( गृभ्णातु ) = स्वीकार करे, अर्थात् तेरा ऐसी उत्तमता से पालन करे कि तू सब रोगों से मुक्त, पूर्ण स्वस्थ हो और तुझमें अदीनता व दिव्य गुणों का विकास हो। ३. ( सा अदितिः ) = वह अदिति माता ( महीम् ) = अत्यन्त महत्त्वपूर्ण ( उखाम् ) = पाकस्थाली ( कृत्वाय ) = करके तथा ( मृन्मयीम् ) = मिट्टी के बने हुए ( अग्नये योनिम् ) = अग्नि के लिए स्थान को, अर्थात् चूल्हे को ( कृत्वाय ) = करके ( पुत्रेभ्यः ) = पुत्रों के लिए उत्तम भोजन को ( प्रायच्छत् ) = देती है, ( श्रपयान् इति ) = जिससे उनका ठीक परिपाक हो सके। ४. सन्तानों के जीवन का निर्माण बहुत कुछ भोजन पर निर्भर है। उस भोजन के परिपाक को गृहपत्नी अत्यन्त महत्त्व देती है। बच्चों की माता इस बात के लिए कटिबद्ध हो कि मैंने ‘अदिति’ बनना है। [ क ] सन्तानों के स्वास्थ्य को कभी खण्डित नहीं होने देना है, [ ख ] उन्हें अदीन बनाना है, [ ग ] उनमें दिव्य गुणों का पोषण करना है।
Essence
भावार्थ — माता का मुख्य कर्त्तव्य बच्चों को स्वस्थ बनाना तथा उनके जीवन का उत्तम परिपाक करना है। इसी दृष्टिकोण से वह भोजन को महत्त्व देती है, क्योंकि भोजन ने ही उनके शरीर व मनों को स्वस्थ करना है।
Subject
अदिति की रास्ना