Yajurveda Bhashya (Swami Dayanand Saraswati)

Yajurveda Adhyay 38 / Mantra 15

28 Mantra
38/15
Devata- पूषादयो लिङ्गोक्ता देवताः Rishi- दीर्घतमा ऋषिः Chhand- स्वराड् जगती Swara- निषादः
Mantra with Swara
स्वाहा॑ पू॒ष्णे शर॑से॒ स्वाहा॒ ग्राव॑भ्यः॒ स्वाहा॑ प्रतिर॒वेभ्यः॑। स्वाहा॑ पि॒तृभ्य॑ऽ ऊ॒र्ध्वब॑र्हिर्भ्यो घर्म॒पावभ्यः॒ स्वाहा॒ द्यावा॑पृथि॒वीभ्या॒ स्वाहा॒ विश्वे॑भ्यो दे॒वेभ्यः॑॥१५॥

स्वाहा॑। पू॒ष्णे। शर॑से। स्वाहा॑। ग्राव॑भ्य॒ इति॒ ग्राव॑ऽभ्यः। स्वाहा॑। प्र॒ति॒र॒वेभ्य॒ इति॑ प्रतिऽर॒वेभ्यः॑ ॥ स्वाहा॑। पि॒तृभ्य॒ इति॒ पि॒तृऽभ्यः॑। ऊ॒र्ध्वब॑र्हिभ्य॒ इत्यू॒र्ध्वऽब॑र्हिःऽभ्यः। घ॒र्म॒पाव॑भ्य॒ इति॑ घर्म॒ऽपाव॑भ्यः। स्वाहा॑। द्यावा॑पृथि॒वीभ्या॑म्। स्वाहा॑। विश्वे॑भ्यः। दे॒वेभ्यः॑ ॥१५ ॥

Mantra without Swara
स्वाहा पूष्णे शरसे स्वाहा ग्रावभ्यः स्वाहा प्रतिरवेभ्यः स्वाहा पितृभ्यऽऊर्ध्वबर्हिर्भ्या घर्मपावभ्यः स्वाहा द्यावापृथिवीभ्याँ स्वाहा विश्वेभ्यः देवेभ्यः ॥

स्वाहा। पूष्णे। शरसे। स्वाहा। ग्रावभ्य इति ग्रावऽभ्यः। स्वाहा। प्रतिरवेभ्य इति प्रतिऽरवेभ्यः॥ स्वाहा। पितृभ्य इति पितृऽभ्यः। ऊर्ध्वबर्हिभ्य इत्यूर्ध्वऽबर्हिःऽभ्यः। घर्मपावभ्य इति घर्मऽपावभ्यः। स्वाहा। द्यावापृथिवीभ्याम्। स्वाहा। विश्वेभ्यः। देवेभ्यः॥१५॥

Yajurveda Bhashya (Swami Dayanand Saraswati)

हिन्दी
Yajurveda Bhashya (Swami Dayanand Saraswati) - हिन्दी
Meaning
स्त्री-पुरुष को योग्य है कि (पूष्णे) पुष्टिकारक (शरसे) हिंसक के लिये (स्वाहा) सत्यक्रिया अर्थात् अधर्म से बचाने का उपाय (प्रतिरवेभ्यः) शब्द के प्रति शब्द करनेहारों के लिये (स्वाहा) सत्यवाणी (ग्रावभ्यः) गर्जनेवाले मेघों के लिये (स्वाहा) सत्यक्रिया (ऊर्द्ध्वबर्हिभ्यः) उत्तम कक्षा तक बढ़े हुए (घर्मपावभ्यः) यज्ञ से संसार को पवित्र करनेहारे (पितृभ्यः) रक्षक ऋतुओं के तुल्य वर्त्तमान सज्जनों के लिये (स्वाहा) सत्यवाणी (द्यावापृथिवीभ्याम्) सूर्य्य और आकाश के लिये (स्वाहा) सत्यक्रिया और (विश्वेभ्यः) समग्र (देवेभ्यः) पृथिव्यादि वा विद्वानों के लिये (स्वाहा) सत्यक्रिया वा सत्यवाणी का सदा प्रयोग किया करें॥१५॥
Essence
स्त्री-पुरुषों को चाहिये कि सत्यविज्ञान और सत्यक्रिया से ऐसा पुरुषार्थ करें, जिससे सबको पुष्टि और आनन्द होवे॥१५॥
Subject
फिर उसी विषय को अगले मन्त्र में कहा है॥