Yajurveda Bhashya (Swami Dayanand Saraswati)

Yajurveda Adhyay 33 / Mantra 83

97 Mantra
33/83
Devata- विश्वेदेवा देवताः Rishi- मेधातिथिर्ऋषिः Chhand- निचृत्सतः पङ्क्तिः Swara- पञ्चमः
Mantra with Swara
अ॒यंꣳ स॒हस्र॒मृषि॑भिः॒ सह॑स्कृतः समु॒द्रऽइ॑व पप्रथे।स॒त्यः सोऽअ॑स्य महि॒मा गृ॑णे॒ शवो॑ य॒ज्ञेषु॑ विप्र॒राज्ये॑॥८३॥

अ॒यम्। स॒हस्र॑म्। ऋषि॑भि॒रित्यृषि॑ऽभिः। सह॑स्कृतः। सहः॑कृत॒ इति॒ सहः॑ऽकृतः। स॒मु॒द्रःऽइ॒वेति॑ समु॒द्रःऽइ॑व। प॒प्र॒थे॒ ॥ स॒त्यः। सः। अ॒स्य॒। म॒हि॒मा। गृ॒णे॒। शवः॑। य॒ज्ञेषु॑। वि॒प्र॒राज्य॒ इति॑ विप्र॒ऽराज्ये॑ ॥८३ ॥

Mantra without Swara
अयँ सहस्रमृषिभिः सहस्कृतः समुद्र इव पप्रथे । सत्यः सो अस्य महिमा गृणे शवो यज्ञेषु विप्रराज्ये ॥

अयम्। सहस्रम्। ऋषिभिरित्यृषिऽभिः। सहस्कृतः। सहःकृत इति सहःऽकृतः। समुद्रःऽइवेति समुद्रःऽइव। पप्रथे॥ सत्यः। सः। अस्य। महिमा। गृणे। शवः। यज्ञेषु। विप्रराज्य इति विप्रऽराज्ये॥८३॥

Yajurveda Bhashya (Swami Dayanand Saraswati)

हिन्दी
Yajurveda Bhashya (Swami Dayanand Saraswati) - हिन्दी
Meaning
हे मनुष्यो! जो (अयम्) यह सभापति राजा (ऋषिभिः) वेदार्थवेत्ता राजर्षियों के साथ (सहस्रम्) असंख्य प्रकार के ज्ञान को प्राप्त (सहस्कृतः) बल से संयुक्त (सत्यः) और श्रेष्ठ व्यवहारों वा विद्वानों में उत्तम चतुर है (अस्य) इसका (महिमा) महत्त्व (समुद्रइव) समुद्र वा अन्तरिक्ष के तुल्य (पप्रथे) प्रसिद्ध होता है तो (सः) वह पूर्वोक्त मैं प्रजाजन इस राजा के (यज्ञेषु) संगत राजकार्यों और (विप्रराज्ये) बुद्धिमानों के राज्य में (शवः) बल की (गृणे) स्तुति करता हूं॥८३॥
Essence
जो राजादि राजपुरुष विद्वानों के सङ्ग में प्रीति करनेवाले, साहसी, सत्यगुण-कर्म-स्वभावों से युक्त बुद्धिमान् के राज्य में अधिकार को पाये हुए संगत, न्याय और विनय से युक्त कामों को करें, उनकी आकाश के सदृश कीर्ति विस्तार को प्राप्त होती है॥८३॥
Subject
फिर उसी विषय को अगले मन्त्र में कहा है॥