Yajurveda Bhashya (Swami Dayanand Saraswati)

Yajurveda Adhyay 28 / Mantra 5

46 Mantra
28/5
Devata- इन्द्रो देवता Rishi- बृहदुक्थो वामदेव ऋषिः Chhand- निचृदतिजगती Swara- निषादः
Mantra with Swara
होता॑ यक्ष॒दोजो॒ न वी॒र्यꣳ सहो॒ द्वार॒ऽ इन्द्र॑मवर्द्धयन्।सु॒प्रा॒य॒णाऽ अ॒स्मिन् य॒ज्ञे वि श्र॑यन्ता॒मृता॒वृधो॒ द्वार॒ इन्द्रा॑य मी॒ढुषे॒ व्यन्त्वाज्य॑स्य॒ होत॒र्यज॑॥५॥

होता॑। य॒क्ष॒त्। ओजः॑। न। वी॒र्य᳖म्। सहः॑। द्वारः॑। इन्द्र॑म्। अ॒व॒र्द्ध॒य॒न्। सु॒प्रा॒य॒णाः। सु॒प्रा॒य॒ना इति॑ सुऽप्राय॒नाः। अ॒स्मिन्। य॒ज्ञे। वि। श्र॒य॒न्ता॒म्। ऋ॒ता॒वृधः॑। ऋ॒त॒वृध॒ इत्यृ॑त॒ऽवृधः॑। द्वारः॑। इन्द्रा॑य। मी॒ढुषे॑। व्यन्तु॑। आज्य॑स्य। होतः॑। यज॑ ॥५ ॥

Mantra without Swara
होता यक्षदोजो न वीर्यँ सहो द्वारऽइन्द्रमवर्धयन् । सुप्रायणाऽअस्मिन्यज्ञे विश्रयन्तामृतावृधो द्वारऽइन्द्राय मीढुषे व्यन्त्वाज्यस्य होतर्यज ॥

होता। यक्षत्। ओजः। न। वीर्यम्। सहः। द्वारः। इन्द्रम्। अवर्द्धयन्। सुप्रायणाः। सुप्रायना इति सुऽप्रायनाः। अस्मिन्। यज्ञे। वि। श्रयन्ताम्। ऋतावृधः। ऋतवृध इत्यृतऽवृधः। द्वारः। इन्द्राय। मीढुषे। व्यन्तु। आज्यस्य। होतः। यज॥५॥

Yajurveda Bhashya (Swami Dayanand Saraswati)

हिन्दी
Yajurveda Bhashya (Swami Dayanand Saraswati) - हिन्दी
Meaning
हे (होतः) यज्ञ करनेहारे जन! जैसे जो (सुप्रायणाः) सुन्दर अवकाश वाले (द्वारः) द्वार (ओजः) जलवेग के (न) समान (वीर्यम्) बल (सहः) सहन और (इन्द्रम्) ऐश्वर्य को (अवर्द्धयन्) बढ़ावें, उन (ऋतावृधः) सत्य को बढ़ाने वाले (द्वारः) विद्या और विनय के द्वारों को (मीढुषे) स्निग्ध वीर्यवान् (इन्द्राय) उत्तम ऐश्वर्ययुक्त राजा के लिये (अस्मिन्) इस (यज्ञे) संगति के योग्य संसार में विद्वान् लोग (वि, श्रयन्ताम्) विशेष सेवन करें (आज्यस्य) जानने योग्य राज्य के विषय को (व्यन्तु) प्राप्त हों और (होता) ग्रहीता जन (यक्षत्) यज्ञ करे, वैसे (यज) यज्ञ कीजिये॥५॥
Essence
इस मन्त्र में उपमा और वाचकलुप्तोपमालङ्कार हैं। जो मनुष्य इस संसार में विद्या और धर्म के द्वारों को प्रसिद्ध कर पदार्थविद्या को सम्यक् सेवन करके ऐश्वर्य को बढ़ाते हैं, वे अतुल सुखों को पाते हैं॥५॥
Subject
फिर कैसे मनुष्य सुखी होते हैं, इस विषय को अगले मन्त्र में कहा है॥