Yajurveda Bhashya (Swami Dayanand Saraswati)

Yajurveda Adhyay 28 / Mantra 37

46 Mantra
28/37
Devata- इन्द्रो देवता Rishi- सरस्वत्यृषिः Chhand- भुरिगतिजगती Swara- निषादः
Mantra with Swara
दे॒वीऽउ॒षासा॒नक्ता॑ दे॒वमिन्द्रं॑ वयो॒धसं॑ दे॒वी दे॒वम॑वर्धताम्।अ॒नु॒ष्टुभा॒ छन्द॑सेन्द्रि॒यं बल॒मिन्द्रे॒ वयो॒ दध॑द् वसु॒वने॑ वसु॒धेय॑स्य वीतां॒ यज॑॥३७॥

दे॒वीऽइति॑ दे॒वी। उ॒षासा॒नक्ता॑। उ॒षसा॒नक्तेत्यु॒षसा॒नक्ता॑। दे॒वम्। इन्द्र॑म्। व॒यो॒धस॒मिति॑ वयः॒ऽधस॑म्। दे॒वी। दे॒वम्। अ॒व॒र्ध॒ता॒म्। अ॒नु॒ष्टुभा॑। अ॒नु॒स्तुभेत्य॑नु॒ऽस्तुभा॑। छन्द॑सा। इ॒न्द्रि॒यम्। बल॑म्। इन्द्रे॑। वयः॑। दध॑त्। व॒सु॒वन॒ इति॑ वसु॒ऽवने॑। व॒सु॒धेय॒स्येति॑ वसु॒ऽधेय॑स्य। वी॒ता॒म्। यज॑ ॥३७ ॥

Mantra without Swara
देवीऽउषासानक्ता देवमिन्द्रँवयोधसन्देवी देवमवर्धताम् । अनुष्टुभा च्छन्दसेन्द्रियम्बलमिन्द्रे वयो दधद्वसुवने वसुधेयस्य वीताँयज ॥

देवीऽइति देवी। उषासानक्ता। उषसानक्तेत्युषसानक्ता। देवम्। इन्द्रम्। वयोधसमिति वयःऽधसम्। देवी। देवम्। अवर्धताम्। अनुष्टुभा। अनुस्तुभेत्यनुऽस्तुभा। छन्दसा। इन्द्रियम्। बलम्। इन्द्रे। वयः। दधत्। वसुवन इति वसुऽवने। वसुधेयस्येति वसुऽधेयस्य। वीताम्। यज॥३७॥

Yajurveda Bhashya (Swami Dayanand Saraswati)

हिन्दी
Yajurveda Bhashya (Swami Dayanand Saraswati) - हिन्दी
Meaning
हे विद्वन् जन! जैसे (उषासानक्ता) दिन-रात्रि के समान (देवी) सुन्दर शोभायमान पढ़ाने पढ़ने वाली दो स्त्रियां (वयोधसम्) जीवन को धारण करने वाले (देवम्) उत्तम गुणयुक्त (इन्द्रम्) जीव को जैसे (देवी) उत्तम पतिव्रता स्त्री (देवम्) उत्तम स्त्रीव्रत लम्पटादि दोषरहित पति को बढ़ावे वैसे (अवर्धताम्) बढ़ावें और जैसे (वसुधेयस्य) धनाऽऽधार कोष के (वसुवने) धन को चाहने वाले के अर्थ (वीताम्) उत्पत्ति करें, वैसे (वयः) प्राणों के धारण को (दधत्) पुष्ट करते हुए (अनुष्टुभा, छन्दसा) अनुष्टुप् छन्द से (इन्द्रे) जीवात्मा में (इन्द्रियम्) जीव से सेवन किये (बलम्) बल को (यज) सङ्गत कीजिए॥३७॥
Essence
इस मन्त्र में वाचकलुप्तोपमालङ्कार है। हे मनुष्यो! जैसे प्रीति से स्त्री-पुरुष और व्यवस्था से दिन-रात बढ़ते हैं, वैसे प्रीति और धर्म की व्यवस्था से आप लोग बढ़ा करें॥३७॥
Subject
फिर मनुष्य कैसे बढ़ें, इस विषय को अगले मन्त्र में कहा है॥