Yajurveda Bhashya (Swami Dayanand Saraswati)

Yajurveda Adhyay 24 / Mantra 37

40 Mantra
24/37
Devata- अर्द्धमासादयो देवताः Rishi- प्रजापतिर्ऋषिः Chhand- भुरिग्जगती Swara- निषादः
Mantra with Swara
अ॒न्य॒वा॒पोऽर्द्धमा॒साना॒मृश्यो॑ म॒यूरः॑ सुप॒र्णस्ते ग॑न्ध॒र्वाणा॑म॒पामु॒द्रो मा॒सान् क॒श्यपो॑ रो॒हित् कु॑ण्डृ॒णाची॑ गो॒लत्ति॑का॒ तेऽप्स॒रसां॑ मृ॒त्यवे॑ऽसि॒तः॥३७॥

अ॒न्य॒वा॒प इत्य॑न्यऽवा॒पः। अ॒र्द्ध॒मा॒साना॒मित्य॑र्द्धऽमा॒साना॑म्। ऋश्यः॑। म॒यूरः॑। सु॒प॒र्ण इति॑ सुऽप॒र्णः। ते। ग॒न्ध॒र्वाणा॑म्। अ॒पाम्। उ॒द्रः। मा॒सान्। क॒श्यपः॑। रो॒हित्। कु॒ण्डृ॒णाची॑। गो॒लत्ति॑का। ते। अ॒प्स॒रसा॑म्। मृ॒त्यवे॑। अ॒सि॒तः ॥३७ ॥

Mantra without Swara
अन्यवापोर्धमासानामृश्यो मयूरः सुपर्णस्ते गन्धर्वाणामपामुद्रो मासाङ्कश्यपो रोहित्कुण्डृणाची गोलत्तिका ते प्सरसाम्मृत्यवे सितः ॥

अन्यवाप इत्यन्यऽवापः। अर्द्धमासानामित्यर्द्धऽमासानाम्। ऋश्यः। मयूरः। सुपर्ण इति सुऽपर्णः। ते। गन्धर्वाणाम्। अपाम्। उद्रः। मासान्। कश्यपः। रोहित्। कुण्डृणाची। गोलत्तिका। ते। अप्सरसाम्। मृत्यवे। असितः॥३७॥

Yajurveda Bhashya (Swami Dayanand Saraswati)

हिन्दी
Yajurveda Bhashya (Swami Dayanand Saraswati) - हिन्दी
Meaning
हे मनुष्यो! तुम को जो (अन्यवापः) कोकिला पक्षी है, वह (अर्द्धमासानाम्) पखवाड़ों के अर्थ जो (ऋश्यः) ऋश्य जाति का मृग (मयूरः) मयूर और (सुपर्णः) अच्छे पंखों वाला विशेष पक्षी है, (ते) वे (गन्धर्वाणाम्) गाने वालों के और (अपाम्) जलों के अर्थ जो (उद्रः) जलचर गिंगचा है, वह (मासान्) महीनों के अर्थ जो (कश्यपः) कछुआ (रोहित्) विशेष मृग (कुण्डृणाची) कुण्डृणाची नाम की वन में रहने वाली और (गोलत्तिका) गोलत्तिका नाम वाली विशेष पशुजाति है, (ते) वे (अप्सरसाम्) किरण आदि पदार्थों के अर्थ और जो (असितः) काले गुण वाला विशेष पशु है, वह (मृत्यवे) मृत्यु के लिये जानना चाहिये॥३७॥
Essence
जो काल आदि गुण वाले पशु-पक्षी हैं, वे उपकार वाले हैं, यह जानना चाहिये॥३७॥
Subject
फिर उसी विषय को अगले मन्त्र में कहा है॥