Yajurveda Bhashya (Swami Dayanand Saraswati)

Yajurveda Adhyay 23 / Mantra 14

65 Mantra
23/14
Devata- ब्रह्मादेवता Rishi- प्रजापतिर्ऋषिः Chhand- निचृदनुष्टुप् Swara- गान्धारः
Mantra with Swara
सꣳशि॑तो र॒श्मिना॒ रथः॒ सꣳशि॑तो र॒श्मिना॒ हयः॑। सꣳशि॑तो अ॒प्स्वप्सु॒जा ब्र॒ह्मा सोम॑पुरोगवः॥१४॥

सशि॑त॒ इति॒ सम्ऽशि॑तः। र॒श्मिना॑। रथः॑। सशि॑त॒ इति॒ सम्ऽशि॑तः। र॒श्मिना॑। हयः॑। सशि॑त॒ इति॒ सम्ऽशि॑तः। अ॒प्स्वित्य॒प्ऽसु। अ॒प्सु॒जा इत्य॑प्सु॒ऽजा। ब्र॒ह्मा। सोम॑ऽपुरोगवः ॥१४ ॥

Mantra without Swara
सँशितो रश्मिना रथः सँशितो रश्मिना हयः । सँशितो अप्स्वप्सुजा ब्रह्मा सोमपुरोगवः ॥

सशित इति सम्ऽशितः। रश्मिना। रथः। सशित इति सम्ऽशितः। रश्मिना। हयः। सशित इति सम्ऽशितः। अप्स्वित्यप्ऽसु। अप्सुजा इत्यप्सुऽजा। ब्रह्मा। सोमऽपुरोगवः॥१४॥

Yajurveda Bhashya (Swami Dayanand Saraswati)

हिन्दी
Yajurveda Bhashya (Swami Dayanand Saraswati) - हिन्दी
Meaning
जो मनुष्यों से (रश्मिना) किरणसमूह से (रथः) आनन्द को सिद्ध करने वाला यान (संशितः) अच्छे प्रकार सूक्ष्म कारीगरी से बनाया (रश्मिना) लगाम की रस्सी आदि से (हयः) घोड़ा (संशितः) भलीभांति चलने में तीक्ष्ण अर्थात् उत्तम क्रिया तथा (अप्सु) प्राणों में (अप्सुजाः) जो प्राणवायु रूप से संचार करने वाला पवन वा वाष्प (सोमपुरोगवः) ओषधियों का बोध और ऐश्वर्य्य का योग जिससे पहिले प्राप्त होने वाला है, वह (ब्रह्मा) बड़ा योगी विद्वान् (संशितः) अतिप्रशंसित किया जाये तो क्या-क्या सुख न मिले॥१४॥
Essence
जो मनुष्य पदार्थों के विशेष ज्ञान से विद्वान् होते हैं, वे औरों को विद्वान् करके प्रशंसा को पावें॥१४॥
Subject
फिर विद्वान् लोग क्या करें, इस विषय को अगले मन्त्र में कहा है॥