Yajurveda Bhashya (Swami Dayanand Saraswati)

Yajurveda Adhyay 19 / Mantra 42

95 Mantra
19/42
Devata- सोमो देवता Rishi- वैखानस ऋषिः Chhand- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
पव॑मानः॒ सोऽअ॒द्य नः॑ प॒वित्रे॑ण॒ विच॑र्षणिः। यः पोता॒ स पु॑नातु मा॥४२॥

पव॑मानः। सः। अ॒द्य। नः॒। प॒वित्रे॑ण। विच॑र्षणि॒रिति॒ विऽच॑र्षणिः। यः। पोता॑। सः। पु॒ना॒तु॒। मा॒ ॥४२ ॥

Mantra without Swara
पवमानः सोऽअद्य नः पवित्रेण विचर्षणिः । यः पोता स पुनातु मा ॥

पवमानः। सः। अद्य। नः। पवित्रेण। विचर्षणिरिति विऽचर्षणिः। यः। पोता। सः। पुनातु। मा॥४२॥

Yajurveda Bhashya (Swami Dayanand Saraswati)

हिन्दी
Yajurveda Bhashya (Swami Dayanand Saraswati) - हिन्दी
Meaning
(यः) जो जगदीश्वर (नः) हमारे मध्य में (पवित्रेण) शुद्ध आचरण से (पवमानः) पवित्र (विचर्षणिः) विविध विद्याओं का दाता है, (सः) सो (अद्य) आज हमको पवित्र करने वाला और हमारा उपदेशक है, (सः) सो (पोता) पवित्रस्वरूप परमात्मा (मा) मुझको (पुनातु) पवित्र करे॥४२॥
Essence
मनुष्य लोग ईश्वर के समान धार्मिक होकर अपने सन्तानों को धर्मात्मा करें, ऐसे किये विना अन्य मनुष्यों को भी वे पवित्र नहीं कर सकते॥४२॥
Subject
फिर मनुष्यों को पुत्रादि कैसे पवित्र करने चाहिये, इस विषय को अगले मन्त्र में कहा है॥