Yajurveda Bhashya (Swami Dayanand Saraswati)

Yajurveda Adhyay 19 / Mantra 19

95 Mantra
19/19
Devata- यज्ञो देवता Rishi- हैमवर्चिर्ऋषिः Chhand- निचृदनुष्टुप् Swara- गान्धारः
Mantra with Swara
प्रै॒षेभिः॑ प्रै॒षाना॑प्नोत्या॒प्रीभि॑रा॒प्रीर्य॒ज्ञस्य॑। प्र॒या॒जेभि॑रनुया॒जान् व॑षट्का॒रेभि॒राहु॑तीः॥१९॥

प्रै॒षेभि॒रिति॑ प्रऽए॒षेभिः॑। प्रै॒षानिति॑ प्रऽए॒षान्। आ॒प्नो॒ति॒। आ॒प्रीभि॒रित्या॒ऽप्रीभिः॑। आ॒प्रीरित्या॒ऽप्रीः। य॒ज्ञस्य॑। प्र॒या॒जेभि॒रिति॑ प्रया॒जेभिः॑। अ॒नु॒या॒जानित्य॑नुऽया॒जान्। व॒ष॒ट्का॒रेभि॒रिति॑ वषट्ऽका॒रेभिः॑। आहु॑ती॒रित्याहु॑तीः ॥१९ ॥

Mantra without Swara
प्रैषेभिः प्रैषानाप्नोत्याप्रीभिराप्रीर्यज्ञस्य । प्रयाजेभिरनुयाजान्वषट्कारेभिराहुतीः ॥

प्रैषेभिरिति प्रऽएषेभिः। प्रैषानिति प्रऽएषान्। आप्नोति। आप्रीभिरित्याऽप्रीभिः। आप्रीरित्याऽप्रीः। यज्ञस्य। प्रयाजेभिरिति प्रयाजेभिः। अनुयाजानित्यनुऽयाजान्। वषट्कारेभिरिति वषट्ऽकारेभिः। आहुतीरित्याहुतीः॥१९॥

Yajurveda Bhashya (Swami Dayanand Saraswati)

हिन्दी
Yajurveda Bhashya (Swami Dayanand Saraswati) - हिन्दी
Meaning
जो विद्वान् (प्रैषेभिः) भेजने रूप कर्मों से (प्रैषान्) भेजने योग्य भृत्यों को (आप्रीभिः) सब ओर से प्रसन्नता करनेहारी क्रियाओं से (आप्रीः) सर्वथा प्रीति उत्पन्न करनेहारी परिचारिका स्त्रियों को (प्रयाजेभिः) उत्तम यज्ञ के कर्मों से (अनुयाजान्) अनुकूल यज्ञ-पदार्थों को और (यज्ञस्य) यज्ञ की (वषट्कारेभिः) क्रियाओं से (आहुतीः) अग्नि में छोड़ने योग्य आहुतियों को (आप्नोति) प्राप्त होता है, वह सुखी रहता है॥१९॥
Essence
जो सुशिक्षित सेवकों तथा सेविकाओं वाला साधनों और उपसाधनों से युक्त श्रेष्ठ कार्यों को करता है, वह सब को सुखी करने में समर्थ होता है॥१९॥
Subject
कैसा विद्वान् सुख को प्राप्त होता है, इस विषय को अगले मन्त्र में कहा है॥