Yajurveda Bhashya (Pt. Vedkumar Vedalankar)

Yajurveda Adhyay 23 / Mantra 57

65 Mantra
23/57
Devata- प्रष्टा देवता Rishi- प्रजापतिर्ऋषिः Chhand- निचृत त्रिष्टुप् Swara- धैवतः
Mantra with Swara
कत्य॑स्य वि॒ष्ठाः कत्य॒क्षरा॑णि॒ कति॒ होमा॑सः कति॒धा समि॑द्धः।य॒ज्ञस्य॑ त्वा वि॒दथा॑ पृच्छ॒मत्र॒ कति॒ होता॑रऽऋतु॒शो य॑जन्ति॥५७॥

कति॑। अ॒स्य॒। वि॒ष्ठाः। वि॒स्था इति॑ वि॒ऽस्थाः। कति॑। अ॒क्षरा॑णि। कति॑। होमा॑सः। क॒ति॒धा। समि॑द्ध॒ इति॒ सम्ऽइ॑द्धः। य॒ज्ञस्य॑। त्वा॒। वि॒दथा॑। पृ॒च्छ॒म्। अत्र॑। कति॑। होता॑रः। ऋ॒तु॒श इत्यृ॑तु॒ऽशः। य॒ज॒न्ति॒ ॥५७ ॥

Mantra without Swara
कत्यस्य विष्ठाः कत्यक्षराणि कति होमासः कतिधा समिद्धः । यज्ञस्य त्वा विदथा पृच्छमत्र कति होतारऽऋतुशो यजन्ति ॥

कति। अस्य। विष्ठाः। विस्था इति विऽस्थाः। कति। अक्षराणि। कति। होमासः। कतिधा। समिद्ध इति सम्ऽइद्धः। यज्ञस्य। त्वा। विदथा। पृच्छम्। अत्र। कति। होतारः। ऋतुश इत्यृतुऽशः। यजन्ति॥५७॥

Yajurveda Bhashya (Pt. Vedkumar Vedalankar)

मराठी
Yajurveda Bhashya (Pt. Vedkumar Vedalankar) - मराठी
Meaning
शब्दार्थ - हे विद्वान, सांगा की (अस्य) या (यज्ञस्य) संयोगाने उत्पन्न संसार रूप यज्ञाचे (कति) किती (विष्ठाः) विशेत्वानें स्थित असे आधार आहेत? या यज्ञांची (कति) किती (अक्षराणि) जल आदी साधनें आहेत? (होमासः) दान प्रतिदान करण्याचे पदार्थ (कति) किती आहेत? (समिद्धः) ज्ञान आदीचे प्रकाशक पदार्थ समिधा आदी (कतिधा) किती प्रकारचे आहेत? (होतारः) आदान-प्रदान आदी संसारिक व्यवहारांचे कर्ता (कति) किती आहेत? जे (ऋतुशः) वसंत आदी ऋतूमधे जे (वजन्ति) संगती करतात, (असे पदार्थ) किती आहेत? आा प्रकारे (अस्य) या आध्यात्मिक विषयांबाबत (विदथा) विशेष ज्ञान-प्राप्त्यर्थ मी अनेक शंका उपस्थित (त्वा) आपणा विद्वानांपुढे (पृच्छम्) विचारीत आहे (आपण कृपया त्याचे उत्तर सांगा.) ॥57॥
Essence
भावार्थ - (1)हे जग कुठे कशावर स्थित आहे? (2) याच्या उत्पत्तिची साधनें किती आहेत? (3) व्यापार वा देण्या-घेण्यायोग्य पदार्थ किती (4) ज्ञानाच्या प्रकाश करणार्‍या वस्तू किती आणि (5) व्यवहार करणारे किती आहेत? या पाच प्रश्‍नांची उत्तरें तुम्ही आम्हाला सांगा ॥57॥
Subject
पुढील मंत्रातही काही प्रश्‍न आहेत -