Dayanand Yajurveda Bhashya Bhaskar Sanskrit

Yajurveda Adhyay 12 / Mantra 100

117 Mantra
12/100
Devata- वैद्या देवताः Rishi- वरुण ऋषिः Chhand- विराड्बृहती Swara- मध्यमः
Mantra with Swara
दी॒र्घायु॑स्तेऽओषधे खनि॒ता यस्मै॑ च त्वा॒ खना॑म्य॒हम्। अथो॒ त्वं दी॒र्घायु॑र्भू॒त्वा श॒तव॑ल्शा॒ विरो॑हतात्॥१००॥

दी॒र्घायु॒रिति॑ दी॒र्घऽआ॑युः। ते॒। ओ॒ष॒धे॒। ख॒नि॒ता। यस्मै॑। च॒। त्वा॒। खना॑मि। अ॒हम्। अथो॒ऽइत्यथो॑। त्वम्। दी॒र्घायु॒रिति॑ दी॒र्घऽआ॑युः। भू॒त्वा। श॒तव॒ल्शेति॑ श॒तऽव॑ल्शा। वि। रो॒ह॒ता॒त् ॥१०० ॥

Mantra without Swara
दीर्घायुस्तऽओषधे खनिता यस्मै च त्वा खनाम्यहम् । अथो त्वन्दीर्घायुर्भूत्वा शतवल्शा वि रोहतात् ॥

दीर्घायुरिति दीर्घऽआयुः। ते। ओषधे। खनिता। यस्मै। च। त्वा। खनामि। अहम्। अथोऽइत्यथो। त्वम्। दीर्घायुरिति दीर्घऽआयुः। भूत्वा। शतवल्शेति शतऽवल्शा। वि। रोहतात्॥१००॥

Dayanand Yajurveda Bhashya Bhaskar Sanskrit

संस्कृत
Dayanand Yajurveda Bhashya Bhaskar Sanskrit - संस्कृत
Meaning
(दीर्घायुः) चिरमायुः (ते) तस्या: (ओषधे) ओषधिवद्वर्त्तमान विद्वन् (खनिता) सेवक: (यस्मै) (च) (त्वा) ताम् (खनामि) (अहम्) (अथो) (त्वम्) (दीर्घायुः) (भूत्वा) (शतवल्शा) शतमसंख्याता वल्शा=अङ्कुरा यस्याः सा (वि) (रोहतात्)।। १००।।
Essence
हे मनुष्याः! यूयमोषधिसेवनेन दीर्घायुषो भवत, धर्माचारिणश्च भूत्वा सर्वानोषधिसेवनेनेदृशान् कुरुत।। १२। १००।।
Subject
मनुष्याः कथं भूत्वा स्वभिन्नान् कथं कुर्युरित्याह॥
Meaning of Anvay
हे ओषध इव मनुष्य! यस्य ते तव यामोषधीं खनिताऽहं खनामि तया त्वं दीर्घायुर्भव दीर्घायुर्भूत्वाथो त्वं या शतवल्शौषधी वर्त्तते त्वा तां सेवित्वाऽथ सुखी भव तथा विरोहतात्॥

सपदार्थान्वयः-- हे ओषधे=इव मनुष्य! ओषधिवद्वर्त्तमान विद्वन्! यस्य ते=तव यामोषधीं खनिता सेवकः अहं खनामि, तया त्वं दीर्घायुः चिरमायुः भव। दीर्घायुः चिरमायुः भूत्वा अथो त्वं या शतवल्शा शतमसंख्याता वल्शा=अङ्कुरा यस्याः सा, औषधी वर्त्तते, त्वा=तां सेवित्वा अथ सुखी भव तथा वि+रोहतात्॥

[हे ओषधे इव मनुष्य!.....तया त्वं दीर्घायुर्भव]
Special
वरुणः। वैद्याः=स्पष्टम्। विराड्बृहती। मध्यमः।।