Dayanand Yajurveda Bhashya Bhaskar Hindi

Yajurveda Adhyay 9 / Mantra 28

39 Mantra
9/28
Devata- अग्निर्देवता Rishi- तापस ऋषिः Chhand- भूरिक अनुष्टुप्, Swara- गान्धारः
Mantra with Swara
अग्ने॒ऽअच्छा॑ वदे॒ह नः॒ प्रति॑ नः सु॒मना॑ भव। प्र नो॑ यच्छ सहस्रजि॒त् त्वꣳ हि ध॑न॒दाऽअसि॒ स्वाहा॑॥२८॥

अग्ने॑। अच्छ॑। व॒द॒। इ॒ह। नः॒। प्रति॑। नः॒। सु॒मना॒ इति॑ सु॒ऽमनाः॑। भ॒व॒। प्र। नः॒। य॒च्छ॒। स॒ह॒स्र॒जि॒दिति॑ सहस्रऽजित्। त्वम्। हि। ध॒न॒दा॒ इति॑ धन॒ऽदाः। असि॒। स्वाहा॑ ॥२८॥

Mantra without Swara
अग्ने ऽअच्छा वदेह नः प्रति नः सुमना भव । प्र नो यच्छ सहस्रजित्त्वँ हि धनदा ऽअसि स्वाहा ॥

अग्ने। अच्छ। वद। इह। नः। प्रति। नः। सुमना इति सुऽमनाः। भव। प्र। नः। यच्छ। सहस्रजिदिति सहस्रऽजित्। त्वम्। हि। धनदा इति धनऽदाः। असि। स्वाहा॥२८॥

Dayanand Yajurveda Bhashya Bhaskar Hindi

हिन्दी
Dayanand Yajurveda Bhashya Bhaskar Hindi - हिन्दी
Meaning
हे (अग्ने !) विद्वान् राजन् ! आप (इह) इस समय (स्वाहा) सत्य वारी से (नः) हमें (अच्छ) अच्छा (वद) सत्य उपदेश कीजिये, और (नः) हमारे प्रति (सुमनाः) सौहार्द्र (भव) रखिये ।
आप (हि) क्योंकि (सहस्रजित्) अकेले ही सहस्र योद्धाओं को जीतने वाले तथा (धनदा:) ऐश्वर्य के दाता (असि) हो, अतः (नः) हमें सुख प्रदान कीजिये ॥ ९ । २८ ॥
Essence
ईश्वर उपदेश करता है कि राजा प्रजाजनों और सैनिकों के प्रति सदा सत्य और प्रिय भाषण करें, उन्हें धन देवे और उनसे ग्रहण भी करे।
अपने शरीर और आत्मा के बल को बढ़ाकर, नित्य शत्रुओं को जीतकर धर्म से प्रजा का पालन करे ॥ ९ । २८॥
Subject
फिर वह राजा क्या क्या करे, यह उपदेश किया है ॥
Refrences
(अच्छा) अच्छ। यहां 'निपातस्य च' (अ० ६ । ३ । १३६) इस सूत्र से दीर्घ है । इस मन्त्र की व्याख्या शत० (५।२।२। १०) में की गई है ॥९ । २८ ॥
Commentary Essence
राजा क्या क्या करे--विद्वान राजा अपने समय में सत्य-वाणी से प्रजाजनों और सैनिक जनों को उत्तम रीति से सत्य उपदेश करे । उनके प्रति सत्य और प्रिय भाषण करे। उनसे अत्यन्त सुहृद्भाव रखें । शरीर और आत्मा के बल को बढ़ाकर अकेला ही सहस्रों योद्धाओं को जीते। प्रजाजनों और सैनिकों को ऐश्वर्य (धन) देवे तथा उनसे धन ग्रहण भी करे । धर्म से प्रजा का पालन करके उसे सुख प्रदान करे॥ ९ । २८॥