Dayanand Yajurveda Bhashya Bhaskar Hindi

Yajurveda Adhyay 25 / Mantra 35

48 Mantra
25/35
Devata- विश्वेदेवा देवताः Rishi- गोतम ऋषिः Chhand- स्वराट् त्रिष्टुप् Swara- धैवतः
Mantra with Swara
ये वा॒जिनं॑ परि॒पश्य॑न्ति प॒क्वं यऽई॑मा॒हुः सु॑र॒भिर्निर्ह॒रेति॑।ये चार्व॑तो मासभि॒क्षामु॒पास॑तऽउ॒तो तेषा॑म॒भिगू॑र्त्तिर्नऽइन्वतु॥३५॥

ये। वा॒जिन॑म्। प॒रि॒पश्य॒न्तीति॑ परि॒ऽपश्य॑न्ति। प॒क्वम्। ये। ई॒म्। आ॒हुः। सु॒र॒भिः। निः। ह॒र॒। इति॑। ये। च॒। अर्व॑तः। मा॒स॒ऽभि॒क्षामिति॑ मांꣳसऽभिक्षाम्। उ॒पास॑त॒ इत्यु॑प॒ऽआस॑ते। उ॒तो इत्यु॒तो। तेषा॑म्। अ॒भिगू॑र्त्ति॒रित्य॒भिऽगू॑र्त्तिः। नः॒। इ॒न्व॒तु॒ ॥३५ ॥

Mantra without Swara
ये वाजिनम्परिपश्यन्ति पक्वँय ईमाहुः सुरभिर्निर्हरेति । ये चार्वतो माँसभिक्षामुपासतऽउतो तेषामभिगूर्तिर्न इन्वतु ॥

ये। वाजिनम्। परिपश्यन्तीति परिऽपश्यन्ति। पक्वम्। ये। ईम्। आहुः। सुरभिः। निः। हर। इति। ये। च। अर्वतः। मासऽभिक्षामिति मांꣳसऽभिक्षाम्। उपासत इत्युपऽआसते। उतो इत्युतो। तेषाम्। अभिगूर्त्तिरित्यभिऽगूर्त्तिः। नः। इन्वतु॥३५॥

Dayanand Yajurveda Bhashya Bhaskar Hindi

हिन्दी
Dayanand Yajurveda Bhashya Bhaskar Hindi - हिन्दी
Meaning
(ये) जो (अर्वतः) घोड़े (मांसभिक्षाम्) मांस की याचना (उपासते) करते हैं; (च) और (ये) जो (ईम्) प्राप्त हुए घोड़े को मारने योग्य (आहुः) कहते हैं; उन्हें (निर्हर) दूर फैंक; सर्वथा निकाल दे। और--(ये) जो (वाजिनम्) वेगवान् घोड़े के (पक्वम्) परिपक्व स्वभाव की (परिपश्यन्ति) परीक्षा करते हैं; (उतो) और (तेषाम्) (सुरभिः) सुगन्ध एवं(अभिगूर्ति:) पुरुषार्थ (नः) हमें (इन्वतु) प्राप्त होवे (इति) ऐसी कामना है ॥ २५ । ३५ ॥
Essence
जो लोग घोड़े आदि श्रेष्ठपशुओं के मांस को खाना चाहें उन्हें राजा आदि श्रेष्ठ पुरुष रोकें। जिससे मनुष्यों के उद्यम की सिद्धि हो ॥ २५ । ३५ ॥
Subject
फिर कौन रोकने योग्य हैं, इस विषय का उपदेश किया है॥
Commentary Essence
कौन रोकने योग्य हैं--जो लोग घोड़े के मांस की याचना करते हैं; जो प्राप्त हुए घोड़े को मारने के लिए कहते हैं, उन्हें राजा आदि श्रेष्ठ लोग ऐसा करने से रोकें। जो घोड़ों के परीक्षक उनके परिपक्व स्वभाव की परीक्षा करते हैं उनकी यश-सुगन्ध और उद्यम हमें प्राप्त हो; अर्थात् हम भी उनके संग से घोड़ों के स्वभाव की परीक्षा करें तथा अपने उद्यम को सिद्ध करें ॥ २५ । ३५ ॥