Dayanand Yajurveda Bhashya Bhaskar Hindi

Yajurveda Adhyay 25 / Mantra 29

48 Mantra
25/29
Devata- यज्ञो देवता Rishi- गोतम ऋषिः Chhand- भुरिक् त्रिष्टुप् Swara- धैवतः
Mantra with Swara
यू॒प॒व्र॒स्काऽउ॒त ये यू॑पवा॒हाश्च॒षालं॒ येऽअ॑श्वयू॒पाय॒ तक्ष॑ति। ये चार्व॑ते॒ पच॑नꣳ स॒म्भर॑न्त्यु॒तो तेषा॑म॒भिगू॑र्त्तिर्नऽइन्वतु॥२९॥

यू॒प॒व्र॒स्का ति॑ यूपऽव्र॒स्काः। उ॒त। ये। यू॒प॒वा॒हा इति॑ यूपऽवा॒हाः। च॒षाल॑म्। ये। अ॒श्व॒यू॒पायेति॑ अश्वऽयू॒पाय॑। तक्ष॑ति। ये। च॒। अर्व॑ते। पच॑नम्। स॒म्भर॒न्तीति॑ स॒म्ऽभर॑न्ति। उ॒तोऽइत्यु॒तो। तेषा॑म्। अ॒भिगू॑र्त्ति॒रित्य॒भिऽगू॑र्त्तिः। नः॒। इ॒न्व॒तु॒ ॥२९ ॥

Mantra without Swara
यूपव्रस्काऽउत ये यूपवाहाश्चषालँयेऽअश्वयूपाय तक्षति । ये चार्वते पचनँ सम्भरन्त्युतो तेषामभिगूर्तिर्न इन्वतु ॥

यूपव्रस्का ति यूपऽव्रस्काः। उत। ये। यूपवाहा इति यूपऽवाहाः। चषालम्। ये। अश्वयूपायेति अश्वऽयूपाय। तक्षति। ये। च। अर्वते। पचनम्। सम्भरन्तीति सम्ऽभरन्ति। उतोऽइत्युतो। तेषाम्। अभिगूर्त्तिरित्यभिऽगूर्त्तिः। नः। इन्वतु॥२९॥

Dayanand Yajurveda Bhashya Bhaskar Hindi

हिन्दी
Dayanand Yajurveda Bhashya Bhaskar Hindi - हिन्दी
Meaning
जो (यूपव्रस्का:) यूप=खंभे के छेदक, (उत) और जो (यूपवाहाः) यूप=खंभे को ढोने वाले पुरुष (अश्वयूपाय) घोड़ा बाँधने के खंभे के लिए (चषालम्) चषाल नामक खंभे के अवयव को (तक्षति) छीलते हैं; और जो (अर्वते) घोड़े के लिए (पचनम्) पाक-साधन को (सम्भरन्ति) धारण वा पुष्ट करते हैं, (उतो) और जो प्रयत्न करते हैं; उनका (अभिगूर्तिः) उद्यम=पुरुषार्थ (नः) हमें (इन्वतु) प्राप्त हो॥ २५ । २९॥
Essence
जो शिल्पी लोग काष्ठ-विशेष के बने अश्वबन्धन आदि वस्तुओं को बनाते हैं; और जो वैद्य लोग घोड़ों आदि के औषधों और सम्भारों का संग्रह करते हैं; वे सदा पुरुषार्थी होकर हमें प्राप्त हों ॥ २५ । २९॥
Subject
फिर वे मनुष्य क्या करें, इस विषय का उपदेश किया है॥
Refrences
(तक्षति) तक्षन्ति। यहाँ वचन-व्यत्यय से बहुवचन के स्थान में एकवचन है ॥
Commentary Essence
मनुष्य क्या करें--यूप का छेदन करने वाले, यूप को वहन करने वाले, घोड़े के बन्धनार्थ यूप के लिए चषाल (यूप का अवयव विशेष) का तक्षण करें; अर्थात् शिल्पी लोग काष्ठविशेष से उत्पन्न अश्व-बन्धन (यूप एवं चषाल) आदि वस्तुओं का निर्माण करें। वैद्य लोग घोड़ों के लिए औषध और संभारों का संग्रह करें। सदा उद्यमी हों॥ २५ । २९॥