Dayanand Yajurveda Bhashya Bhaskar Hindi

Yajurveda Adhyay 12 / Mantra 96

117 Mantra
12/96
Devata- वैद्या देवताः Rishi- वरुण ऋषिः Chhand- अनुष्टुप् Swara- गान्धारः
Mantra with Swara
ओष॑धयः॒ सम॑वदन्त॒ सोमे॑न स॒ह राज्ञा॑। यस्मै॑ कृ॒णोति॑ ब्राह्म॒णस्तꣳ रा॑जन् पारयामसि॥९६॥

ओष॑धयः। सम्। अ॒व॒द॒न्त॒। सोमे॑न। स॒ह। राज्ञा॑। यस्मै॑। कृ॒णोति॑। ब्रा॒ह्म॒णः। तम्। रा॒ज॒न्। पा॒र॒या॒म॒सि॒ ॥१६ ॥

Mantra without Swara
ओषधयः समवदन्त सोमेन सह राज्ञा । यस्मै कृणोति ब्राह्मणस्तँ राजन्पारयामसि ॥

ओषधयः। सम्। अवदन्त। सोमेन। सह। राज्ञा। यस्मै। कृणोति। ब्राह्मणः। तम्। राजन्। पारयामसि॥१६॥

Dayanand Yajurveda Bhashya Bhaskar Hindi

हिन्दी
Dayanand Yajurveda Bhashya Bhaskar Hindi - हिन्दी
Meaning
हे मनुष्यो! जो (सोमेन) सोम नामक (राज्ञा) ओषधियों के राजा के साथ वर्त्तमान (ओषधयः) सोम आदि ओषधियाँ हैं उनके विज्ञान के लिए आप (सम्+अवदन्त) परस्पर संवाद करो।
हे (राजन्) प्रकाशमान राजा! हम लोग (ब्राह्मण:) वेदों और उपवेदों का वेत्ता विद्वान् (यस्मै) जिस रोगी के लिए ओषधियों को (कृणोति) बनाता है, उस रोगी को (पारयामसि) रोग-समुद्र से पार ले जाते हैं ।। १२ । ९६ ।।
Essence
वैद्य लोग परस्पर प्रश्न-उत्तर से ओषधि-विज्ञान को ठीक करके, रोगों से रोगियों को पार ले जाकर, सदा सुखी रखें। और जो इन वैद्यों में श्रेष्ठ विद्वान् हो वह सबको आयुर्वेद पढ़ावे ।। १२ । ९६।।
Subject
क्या करने से ओषधियों का विज्ञान बढ़ता है, यह उपदेश किया है ।।
Commentary Essence
पारस्परिक प्रश्नोत्तर विद्या से ओषधि-विद्या की वृद्धि--ओषधि-विद्या के विद्वान् इकट्ठे बैठकर प्रश्नोत्तर विद्या से परस्पर विचार-विनिमय किया करें, जिससे यह विद्या अधिक प्रभावोत्पादक बनकर रोगों के निवारण में समर्थ हो सके। जो इस विद्या का ब्राह्मणः=पूर्ण विद्वान् हो, उसे दूसरों को सिखाने के लिए नियुक्त करें। ऐसा करने से रोगी रोग-सागर से मुक्ति पा सकता है ।। १२ । ९६ ।।