Dayanand Yajurveda Bhashya Bhaskar Hindi

Yajurveda Adhyay 12 / Mantra 93

117 Mantra
12/93
Devata- ओषधयो देवताः Rishi- वरुण ऋषिः Chhand- विराडार्ष्यनुष्टुप् Swara- गान्धारः
Mantra with Swara
याऽओष॑धीः॒ सोम॑राज्ञी॒र्विष्ठि॑ताः पृथि॒वीमनु॑। बृह॒स्पति॑प्रसूताऽअ॒स्यै संद॑त्त वी॒र्य्यम्॥९३॥

याः। ओष॑धीः। सोम॑राज्ञी॒रिति॒ सोम॑ऽराज्ञीः। विष्ठि॑ताः। विस्थि॑ता॒ इति॑ विऽस्थि॑ताः। पृ॒थि॒वीम्। अनु॑। बृह॒स्पति॑प्रसूता॒ इति॑ बृह॒स्पति॑ऽप्रसूताः। अ॒स्यै। सम्। द॒त्त॒। वी॒र्य्य᳖म् ॥९३ ॥

Mantra without Swara
याऽओषधीः सोमराज्ञीर्विष्ठिताः पृथिवीमनु । बृहस्पतिप्रसूता अस्यै सन्दत्त वीर्यम् ॥

याः। ओषधीः। सोमराज्ञीरिति सोमऽराज्ञीः। विष्ठिताः। विस्थिता इति विऽस्थिताः। पृथिवीम्। अनु। बृहस्पतिप्रसूता इति बृहस्पतिऽप्रसूताः। अस्यै। सम्। दत्त। वीर्य्यम्॥९३॥

Dayanand Yajurveda Bhashya Bhaskar Hindi

हिन्दी
Dayanand Yajurveda Bhashya Bhaskar Hindi - हिन्दी
Meaning
हे विवाहित पुरुष ! (याः) जो (सोमराज्ञीः) सोम जिनमें प्रमुख है वे, (बृहस्पतिप्रसूताः) बृहत् कारणरूप प्रकृति के पालक ईश्वर के निर्माण से उत्पन्न (ओषध्यः) ओषधियाँ हैं वे (पृथिवीम्) पृथिवी के (अनु) पृष्ठ भाग पर (विष्ठिताः) विशेष रूप से स्थित हैं, उनसे (अस्यै) इस पत्नी के लिए (वीर्यम्) वीर्यदान कर ।
हे विद्वानो! तुम इन ओषधियों का विज्ञान सबको प्रदान करो।। १२ । ९३ ।।
Essence
स्त्री-पुरुष महौषधियों का सेवन करके उत्तम नियम से गर्भाधान करें। ओषधि-विज्ञान को विद्वानों से ग्रहण करें।
Subject
कैसे सन्तानों को उत्पन्न करें, यह उपदेश किया है।।
Commentary Essence
उत्तम सन्तान का उपाय--उत्तम सन्तति के लिए स्त्री-पुरुषों को योग्य है कि वे अच्छी गुणोत्पादक सोमादि ओषधियों का सेवन करके सब प्रकार की शक्तियों का विकास करके ही सन्तान की इच्छा करें। तब ही अच्छी सन्तान प्राप्त हो सकती है ।। १२ । ९३ ।।