Dayanand Yajurveda Bhashya Bhaskar Hindi

Yajurveda Adhyay 12 / Mantra 77

117 Mantra
12/77
Devata- वैद्यो देवता Rishi- भिषगृषिः Chhand- निचृदनुष्टुप् Swara- गान्धारः
Mantra with Swara
ओष॑धीः॒ प्रति॑मोदध्वं॒ पुष्प॑वतीः प्र॒सूव॑रीः। अश्वा॑ऽइव स॒जित्व॑रीर्वी॒रुधः॑ पारयि॒ष्ण्वः॥७७॥

ओष॑धीः। प्रति॑। मो॒द॒ध्व॒म्। पुष्प॑वती॒रिति॒ पुष्प॑ऽवतीः। प्र॒सूव॑री॒रिति॑ प्र॒ऽसूव॑रीः। अश्वाः॑ऽइ॒वेत्यश्वाः॑ऽइव। स॒जित्व॑री॒रिति॑ स॒ऽजित्व॑रीः। वी॒रुधः॑। पा॒र॒यि॒ष्ण्वः᳖ ॥७७ ॥

Mantra without Swara
ओषधीः प्रति मोदध्वम्पुष्पवतीः प्रसूवरीः । अश्वाऽइव सजित्वरीर्वीरुधः पारयिष्ण्वः ॥

ओषधीः। प्रति। मोदध्वम्। पुष्पवतीरिति पुष्पऽवतीः। प्रसूवरीरिति प्रऽसूवरीः। अश्वाःऽइवेत्यश्वाःऽइव। सजित्वरीरिति सऽजित्वरीः। वीरुधः। पारयिष्ण्वः॥७७॥

Dayanand Yajurveda Bhashya Bhaskar Hindi

हिन्दी
Dayanand Yajurveda Bhashya Bhaskar Hindi - हिन्दी
Meaning
हे मनुष्यो ! तुम (अश्वा) घोड़ों के समान (सजित्वरी:) शरीर से संयुक्त एवं रोगों को जीतने वाली, (वीरुधः) सोमलता आदि, (पारयिष्णवः) रोगज दुःखों से पार ले जाने वाली (पुष्पवतीः) प्रशंसनीय पुष्पों वाली, (प्रसूवरी:) सुखों को उत्पन्न करने वाली (ओषधीः) सोम आदि ओषधियों का सेवन करके (प्रति+मोदध्वम्) आनन्दित रहो ।। १२ । ७७ ।।
Essence
इस मन्त्र में उपमा अलंकार है। जैसे--अश्वारोही वीर शत्रुओं को जीतकर, विजय को प्राप्त करके आनन्द करते हैं, वैसे उत्तम औषध का सेवन करने वाले, पथ्यकारी, जितेन्द्रिय लोग आरोग्य को प्राप्त करके नित्य हर्षित रहते हैं ।। १२ । ७७ ।।
Subject
कैसी ओषधियों का सेवन करना चाहिये, यह उपदेश किया है।।
Commentary Essence
१. कैसी ओषधियाँ सेवन करनी चाहिये--शरीर को स्वस्थ रखने के लिये ऐसी ओषधियों का सेवन करें, जो अश्वाः=घोड़ों के समान सजित्वरी=रोगों को जीतने वाली हों, पारयिष्णवः=रोगों से पार ले जाने वाली हों, पुष्पवतीः=प्रशंसनीय फूलों वाली हों, और प्रसूवरी:= दुःखों से दूर करके सुखों को उत्पन्न करने वाली हों। ऐसे गुणों वाली ओषधियों के सेवन से सदा आनन्द की वृद्धि होती है। '
२. अलङ्कार -- इस मन्त्र में उपमा अलङ्कार है। जैसे घोड़ों पर चढ़कर वीर शत्रुओं को जीतकर आनन्दित होते हैं वैसे ही उत्तमौषधियों के सेवन से सदा स्वस्थ रहें ।। १२ । ७७ ।।