Dayanand Yajurveda Bhashya Bhaskar Hindi

Yajurveda Adhyay 12 / Mantra 7

117 Mantra
12/7
Devata- अग्निर्देवता Rishi- वत्सप्रीर्ऋषिः Chhand- भुरिगार्षयनुष्टुप् Swara- गान्धारः
Mantra with Swara
अग्ने॑ऽभ्यावर्त्तिन्न॒भि मा॒ निव॑र्त्त॒स्वायु॑षा॒ वर्च॑सा प्र॒जया॒ धने॑न। स॒न्या मे॒धया॑ र॒य्या पोषे॑ण॥७॥

अग्ने॑। अ॒भ्या॒व॒र्त्ति॒न्नित्य॑भिऽआवर्त्तिन्। अ॒भि। मा॒। नि। व॒र्त्त॒स्व॒। आयु॑षा। वर्च॑सा। प्र॒जयेति॑ प्र॒ऽजया॑। धने॑न। स॒न्या। मे॒धया॑। र॒य्या। पोषे॑ण ॥७ ॥

Mantra without Swara
अग्नेभ्यावर्तिन्नभि मा नि वर्तस्वायुषा वर्चसा प्रजया धनेन । सन्या मेधया रय्या पोषेण ॥

अग्ने। अभ्यावर्त्तिन्नित्यभिऽआवर्त्तिन्। अभि। मा। नि। वर्त्तस्व। आयुषा। वर्चसा। प्रजयेति प्रऽजया। धनेन। सन्या। मेधया। रय्या। पोषेण॥७॥

Dayanand Yajurveda Bhashya Bhaskar Hindi

हिन्दी
Dayanand Yajurveda Bhashya Bhaskar Hindi - हिन्दी
Meaning
हे (अभ्यावर्त्तिन्) सम्मुख अच्छा वर्ताव करने वाले, (अग्ने) पुरुषार्थी विद्वान् ! आप (आयुषा) चिरायु से, (वर्चसा) अन्न, अध्ययन आदि से, (प्रजया) सन्तान से, (धनेन) धन से, (सन्या) सब विद्याओं का संविभाग करने वाली (मेधया) मेधा-बुद्धि से, (रय्या) विद्या की शोभा और (पोषेण) पुष्टि से युक्त होकर (अभि+नि+वर्तस्व) सर्वथा अच्छा बर्ताव करो, और [मा] मुझे इनसे संयुक्त करो ।। १२ । ७ ।।
Essence
मनुष्य भू-गर्भ आदि विद्या के बिना ऐश्वर्य को प्राप्त नहीं कर सकते। मेधा बुद्धि के बिना विद्या प्राप्त नहीं हो सकती ।। १२ । ७ ॥
Subject
फिर विद्वानों के गुणों का उपदेश किया है ।।
Commentary Essence
विद्वान् के गुण-- भूगर्भविद्यादि सभी विद्याओं का ज्ञाता, परम पुरुषार्थी विद्वान् को योग्य है कि वह चिरायु होकर विद्या के तेज को प्राप्त करे। धन-धान्य से सम्पन्न होकर श्रेष्ठ सन्तान वाला हो। सभी विद्याओं को ग्रहण करने वाली मेधा बुद्धि से युक्त होकर विद्या की शोभा को सदा बढ़ाया करे ।। १२ । ७ ।।