Dayanand Yajurveda Bhashya Bhaskar Hindi

Yajurveda Adhyay 12 / Mantra 60

117 Mantra
12/60
Devata- दम्पती देवते Rishi- मधुच्छन्दा ऋषिः Chhand- आर्षी पङ्क्तिः Swara- पञ्चमः
Mantra with Swara
भव॑तन्नः॒ सम॑नसौ॒ सचे॑तसावरे॒पसौ॑। मा य॒ज्ञꣳ हि॑ꣳसिष्टं॒ मा य॒ज्ञप॑तिं जातवेदसौ शि॒वौ भ॑वतम॒द्य नः॑॥६०॥

भव॑तम्। नः॒। सम॑नसा॒विति॒ सऽम॑नसौ। सचे॑तसा॒विति॒ सऽचे॑तसौ। अ॒रे॒पसौ॑। मा। य॒ज्ञम्। हि॒ꣳसि॒ष्ट॒म्। मा। य॒ज्ञप॑ति॒मिति॑ य॒ज्ञऽप॑तिम्। जा॒त॒वे॒द॒सा॒विति॑ जातऽवेदसौ। शि॒वौ। भ॒व॒त॒म्। अ॒द्य। नः॒ ॥६० ॥

Mantra without Swara
भवतन्नः समनसौ सचेतसावरेपसौ । मा यज्ञँ हिँसिष्टम्मा यज्ञपतिञ्जातवेदसौ शिवौ भवतमद्य नः ॥

भवतम्। नः। समनसाविति सऽमनसौ। सचेतसाविति सऽचेतसौ। अरेपसौ। मा। यज्ञम्। हिꣳसिष्टम्। मा। यज्ञपतिमिति यज्ञऽपतिम्। जातवेदसाविति जातऽवेदसौ। शिवौ। भवतम्। अद्य। नः॥६०॥

Dayanand Yajurveda Bhashya Bhaskar Hindi

हिन्दी
Dayanand Yajurveda Bhashya Bhaskar Hindi - हिन्दी
Meaning
हे विवाहित स्त्री-पुरुषो! तुम दोनों (नः) हमारे लिए (समनसौ) समान विचार वाले, (सचेतसौ) समान ज्ञान वाले, (अरेपसौ) निर्दोष (भवतम्) बनो, (यज्ञम्) संग के योग्य धर्म का (मा हिंसिष्टम्) हिंसन मत करो, (यज्ञपतिम्) उपदेश के द्वारा धर्म के रक्षक का (मा हिंसिष्टम्) हिंसन मत करो। (अद्य) आज (नः) हमारे लिए (जातवेदसौ) उत्पन्न सकल विज्ञान वाले एवं (शिवौ) मङ्गलकारी (भवतम्) हों ॥
Essence
स्त्री-पुरुष सत्य उपदेश /अध्यापन के लिए पूर्ण विद्या वाले, प्रगल्भ चतुर, निष्कपट, आप्त विद्वानों से नित्य प्रार्थना करें ।
और विद्वान् सबको ऐसा उपदेश करें जिससे सब धार्मिक होवें ।। १२ । ६० ।।
Subject
फिर सबको चाहिये कि विद्या देने के लिए आप्त विद्वानों से प्रार्थना करें, इस विषय का उपदेश किया है ।।
Commentary Essence
गृहस्थ-धर्म--विवाहित स्त्री-पुरुषों को योग्य है कि वे दुर्व्यसनों से दूर रह कर समान विचार वाले तथा समान ज्ञान वाले होकर रहें। गृहस्थ के योग्य धर्म का कभी उल्लंघन न करें। और जो धर्म का प्रचार करके धर्म की रक्षा करते हैं, ऐसे धार्मिक विद्वानों का सदा सत्कार करें। अपूज्यों की पूजा कभी न करें। किन्तु पूज्य, सकल विज्ञान से पूर्ण विद्वानों के लिए सदा मङ्गलकारी बने रहें ।। १२ । ६० ।।