Dayanand Yajurveda Bhashya Bhaskar Hindi

Yajurveda Adhyay 12 / Mantra 22

117 Mantra
12/22
Devata- अग्निर्देवता Rishi- वत्सप्रीर्ऋषिः Chhand- निचृदार्षी त्रिष्टुप् Swara- धैवतः
Mantra with Swara
श्री॒णामु॑दा॒रो ध॒रुणो॑ रयी॒णां म॑नी॒षाणां॒ प्रार्प॑णः॒ सोम॑गोपाः। वसुः॑ सू॒नुः सह॑सोऽअ॒प्सु राजा॒ विभा॒त्यग्र॑ऽउ॒षसा॑मिधा॒नः॥२२॥

श्री॒णाम्। उ॒दा॒र इत्यु॑त्ऽआ॒रः। ध॒रुणः॑। र॒यी॒णाम्। म॒नी॒षाणा॑म्। प्रार्प॑ण॒ इति॑ प्र॒ऽअर्प॑णः। सोम॑गोपा॒ इति॒ सोम॑ऽगोपाः। वसुः॑। सु॒नुः। सह॑सः। अ॒प्स्वित्य॒प्ऽसु। राजा॑। वि। भा॒ति॒। अग्रे॑। उ॒षसा॑म्। इ॒धा॒नः ॥२२ ॥

Mantra without Swara
श्रीणामुदारो धरुणो रयीणाम्मनीषाणाम्प्रार्पणः सोमगोपाः । वसुः सूनुः सहसो अप्सु राजा विभात्यग्रऽउषसामिधानः ॥

श्रीणाम्। उदार इत्युत्ऽआरः। धरुणः। रयीणाम्। मनीषाणाम्। प्रार्पण इति प्रऽअर्पणः। सोमगोपा इति सोमऽगोपाः। वसुः। सुनुः। सहसः। अप्स्वित्यप्ऽसु। राजा। वि। भाति। अग्रे। उषसाम्। इधानः॥२२॥

Dayanand Yajurveda Bhashya Bhaskar Hindi

हिन्दी
Dayanand Yajurveda Bhashya Bhaskar Hindi - हिन्दी
Meaning
हे मनुष्यो ! तुम जो (उषसाम्) प्रभात वेलाओं के (अग्रे) सम्मुख (इधानः) प्रदीप्यमान सूर्य के समान, (श्रीणाम्) लक्ष्मी का (उदार:) परीक्षापूर्वक उत्कृष्ट दान करने वाला, (रयीणाम्) धनों का (धरुणः ) आधार, (मनीषाणाम्) जानने का साधन प्रज्ञान=बुद्धियों को (प्रार्पण) प्राप्त कराने वाला, (सोमगोपाः) सोम=ओषधियों वा ऐश्वर्यों का रक्षक, (सहसः) बलवान् पिता का (सूनुः) पुत्र (वसुः) वसु ब्रह्मचारी बनकर (अप्सु) प्राणों में (राजा) प्रकाशमान होकर (वि+भाति) चमकता है, उसे सर्वाध्यक्ष=राजा बनावें ।। १२। २२ ॥
Essence
मनुष्य जो सुपात्रों को दान देने वाला, धन को व्यर्थ व्यय न करने वाला, सब को विद्या और बुद्धि देने वाला, ब्रह्मचारी, जितेन्द्रिय का पुत्र, योगाङ्गों के अनुष्ठान से प्रकाशमान, सूर्य के समान शत्रु के गुण, कर्म, स्वभावों में देदीप्यमान, पिता के समान प्रजा का पालक पुरुष है, उसका राज्य-कर्म के लिये अभिषेक करें ।। १२ । २२ ।।
Subject
यहाँ राज-कार्य में कैसे पुरुष को राजा बनावें, यह उपदेश किया है ।।
Commentary Essence
राजधर्म--जिसने ब्रह्मचर्य का पालन करके सभी प्रकार की शक्तियों का विकास किया है और जो सूर्य की तरह शत्रु वर्ग में प्रकाशमान है। और शुभ कार्यों में लोभ न करके उदारता से दान देने वाला है और सभी प्रकार की प्राणपोषक ओषधियों का रक्षक हो, वह राजा बनने के योग्य है। राजा बनाने से पूर्व यह भी ध्यान रखना चाहिए कि ऊँचे कुल में पैदा हुआ हो तथा शूरवीर पिता का पुत्र हो ।। १२ । २२ ।।