Dayanand Yajurveda Bhashya Bhaskar Hindi

Yajurveda Adhyay 12 / Mantra 20

117 Mantra
12/20
Devata- अग्निर्देवता Rishi- वत्सप्रीर्ऋषिः Chhand- निचृदार्षी त्रिष्टुप् Swara- धैवतः
Mantra with Swara
स॒मु॒द्रे त्वा॑ नृ॒मणा॑ऽअ॒प्स्वन्तर्नृ॒चक्षा॑ऽईधे दि॒वो अ॑ग्न॒ऽऊध॑न्। तृ॒तीये॑ त्वा॒ रज॑सि तस्थि॒वास॑म॒पामु॒पस्थे॑ महि॒षाऽअ॑वर्धन्॥२०॥

स॒मु॒द्रे। त्वा॒। नृ॒मणाः॑। नृ॒मना॒ इति॑ नृ॒ऽमनाः॑। अ॒प्स्वित्य॒प्ऽसु। अ॒न्तः। नृ॒चक्षा॒ इति॑ नृ॒चऽक्षाः॑। ई॒धे॒। दि॒वः। अ॒ग्ने॒। ऊध॑न्। तृ॒तीये॑। त्वा॒। रज॑सि। त॒स्थि॒वास॒मिति॑ तस्थि॒ऽवास॑म्। अ॒पाम्। उ॒पस्थ॒ इत्यु॒पऽस्थे॑। म॒हि॒षाः। अ॒व॒र्ध॒न् ॥२० ॥

Mantra without Swara
समुद्रे त्वा नृमणाऽअप्स्वन्तर्नृचक्षाऽईधे दिवोऽअग्नऽऊधन् । तृतीये त्वा रजसि तस्थिवाँसमपामुपस्थे महिषा अवर्धन् ॥

समुद्रे। त्वा। नृमणाः। नृमना इति नृऽमनाः। अप्स्वित्यप्ऽसु। अन्तः। नृचक्षा इति नृचऽक्षाः। ईधे। दिवः। अग्ने। ऊधन्। तृतीये। त्वा। रजसि। तस्थिवासमिति तस्थिऽवासम्। अपाम्। उपस्थ इत्युपऽस्थे। महिषाः। अवर्धन्॥२०॥

Dayanand Yajurveda Bhashya Bhaskar Hindi

हिन्दी
Dayanand Yajurveda Bhashya Bhaskar Hindi - हिन्दी
Meaning
हे (अग्ने) विद्वान् राजन् ! (नृमणाः) नेताओं में मन वाला मैं (त्वा) आपको (समुद्रे) अन्तरिक्ष में अग्नि के समान (ईधे) प्रदीप्त करता हूँ, (नृचक्षाः) सब मनुष्यों को देखने वाला मैं आपको (अप्सु) अन्न वा जल (अन्तः) में (ईधे) प्रकाशित करता हूँ। (दिवः) सूर्य-प्रकाश की (ऊधन्) उषा में, (तृतीये) तीसरे (रजसि ) लोक में (तस्थिवांसम्) स्थित सूर्य के समान (त्वा) आपको (अपाम्) जलों के (उपस्थे) पास में (महिषा) महान् विद्वान् लोग (अवर्धन्) बढ़ावें सो आप हमें सदा बढ़ाओ ।। १२ । २० ।।
Essence
प्रजा में विद्यमान सब प्रधान राज-वर्ग को नित्य बढ़ावें, और राज-पुरुष प्रजाजनों को बढ़ावें ।। १२ । २० ।।
Subject
फिर राजा और प्रजा के सम्बन्ध का उपदेश किया है ।।
Refrences
'ऊधन्' यहाँ ऊधस् शब्द (निघं० १।८) उषा के नामों में पढ़ा है । 'महिषाः' यहाँ महिष शब्द ( निघं० ३ । ३) में महन्नामों में पढ़ा है ।
Commentary Essence
राज-प्रजाधर्म--प्रजाजनों को, उन्नति पथ पर ले जाने वाले, नृचक्षाः=सभी मनुष्यों को समानता से देखने वाले, अन्नादि उत्पन्न करने में सदा सहायक, सब मनुष्यों में उत्कृष्ट राजा को सदा बढ़ाना चाहिये। इसी प्रकार राजा प्रजा को बढ़ाया करे ।। १२ । २० ।।