Dayanand Yajurveda Bhashya Bhaskar Hindi

Yajurveda Adhyay 12 / Mantra 11

117 Mantra
12/11
Devata- अग्निर्देवता Rishi- ध्रुव ऋषिः Chhand- आर्ष्यनुष्टुप् Swara- गान्धारः
Mantra with Swara
आ त्वा॑हार्षम॒न्तर॑भूर्ध्रु॒वस्ति॒ष्ठावि॑चाचलिः। विश॑स्त्वा॒ सर्वा॑ वाञ्छन्तु॒ मा त्वद्रा॒ष्ट्रमधि॑भ्रशत्॥११॥

आ। त्वा॒। अ॒हा॒र्ष॒म्। अ॒न्तः। अ॒भूः॒। ध्रु॒वः। ति॒ष्ठ॒। अवि॑चाचलि॒रित्यवि॑ऽचाचलिः। विशः॑। त्वा॒। सर्वाः॑। वा॒ञ्छ॒न्तु॒। मा। त्वत्। रा॒ष्ट्रम्। अधि॑। भ्र॒श॒त् ॥११ ॥

Mantra without Swara
आ त्वाहार्षमन्तरभूर्ध्रुवस्तिष्ठाविचाचलिः । विशस्त्वा सर्वा वाञ्छन्तु मा त्वद्राष्ट्रमधिभ्रशत् ॥

आ। त्वा। अहार्षम्। अन्तः। अभूः। ध्रुवः। तिष्ठ। अविचाचलिरित्यविऽचाचलिः। विशः। त्वा। सर्वाः। वाञ्छन्तु। मा। त्वत्। राष्ट्रम्। अधि। भ्रशत्॥११॥

Dayanand Yajurveda Bhashya Bhaskar Hindi

हिन्दी
Dayanand Yajurveda Bhashya Bhaskar Hindi - हिन्दी
Meaning
हे शुभ गुण और लक्षणों वाले सभापति राजन् ! (त्वा) आप राजा को राज्य-पालन के लिए मैं (अन्तः) सभा के मध्य में (आ+अहार्षम्) स्वीकार करता हूँ।
आप (अन्तः) सभा के मध्य में (अभूः) विद्यमान रहें। (अविचाचलिः) सर्वथा निश्चल तथा (ध्रुवः) न्यायपूर्वक राज्य-पालन में दृढ़ होकर (तिष्ठ) स्थिर रहो।
(सर्वाः) सब (विशः) प्रजा (त्वा) आपको (वाञ्छन्तु) चाहे । (त्वत्) आपके अनाचार से (राष्ट्रम्) राज्य (मा अधि+भ्रशत्) नष्ट न हो ।
श्रेष्ठ प्रजाजन सर्वश्रेष्ठ पुरुष को सभाध्यक्ष राजा बनाकर उसे उपदेश करें—
आप जितेन्द्रिय होकर सदा धर्मात्मा और पुरुषार्थी बनो। आपके अनाचार से राष्ट्र कभी नष्ट न हो। जिससे सब प्रजा आपके अनुकूल रहे।
Subject
फिर राजा और प्रजा के कर्मों का उपदेश किया है ।।
Commentary Essence
प्रजा कैसे पुरुष को राजा बनाये-- राजा बनाने से पहले उसकी परीक्षा करनी चाहिये। राजा वही बन सकता है, जो बाधाओं से अथवा विपत्ति में कभी विचलित न होता हो। जो सभा में अथवा न्यायालय में दृढ़ होकर निष्पक्ष न्याय करने वाला हो। प्रजावत्सल हो, और जो दुराचारादि व्यसनों में फंसकर राज्य का विनाश न करने वाला है। जितेन्द्रिय होकर पुरुषार्थ से प्रजा को अपने अनुकूल रखने वाला हो ।। १२ । ११ ।।