Dayanand Yajurveda Bhashya Bhaskar Hindi

Yajurveda Adhyay 11 / Mantra 68

83 Mantra
11/68
Devata- अम्बा देवता Rishi- आत्रेय ऋषिः Chhand- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
मा सु भि॑त्था॒ मा सु रि॒षोऽम्ब॑ धृ॒ष्णु वी॒रय॑स्व॒ सु। अ॒ग्निश्चे॒दं क॑रिष्यथः॥६८॥

मा। सु। भि॒त्थाः॒। मा। सु। रि॒षः॒। अम्ब॑। धृ॒ष्णु। वी॒रय॑स्व। सु। अ॒ग्निः। च॒। इ॒दम्। क॒रि॒ष्य॒थः॒ ॥६८ ॥

Mantra without Swara
मा सु भित्था मा सु रिषो म्ब धृष्णु वीरयस्व सु । अग्निश्चेदङ्करिष्यथः ॥

मा। सु। भित्थाः। मा। सु। रिषः। अम्ब। धृष्णु। वीरयस्व। सु। अग्निः। च। इदम्। करिष्यथः॥६८॥

Dayanand Yajurveda Bhashya Bhaskar Hindi

हिन्दी
Dayanand Yajurveda Bhashya Bhaskar Hindi - हिन्दी
Meaning
हे (अम्ब) माता! तू हमें विद्या से (मा सु+भित्थाः) मत अलग कर, (मा सु+रिषः) हमारा हिंसन मत कर, अपितु (धृष्णु) दृढ़तापूर्वक (सु+वीरयस्व) प्रारम्भ किये हुये कर्म को पूरा कर। इस प्रकार आचरण करते हुये तुम दोनों माता-पिता (अग्निः) अग्नि के समान (इदम्) इस करने योग्य कार्य को (करिष्यथः) सिद्ध कर सकोगे ॥ ११ । ६८ ॥
Essence
माता उत्तम सन्तानों को उत्तम शिक्षा करे, जिससे ये परस्पर प्रसन्न रहें। और वीर होकर जो कर्त्तव्य कर्म है उसे करें और अकर्त्तव्य का आचरण न करें ॥ ११ । ६८ ॥
Subject
फिर माता-पिता के प्रति पुत्रादि क्या-क्या कहें, यह उपदेश किया है॥
Commentary Essence
माता का कर्त्तव्य--माता-पिता अपने पुत्र तथा पुत्रियों को विद्या ग्रहण कराने में सदा प्रयत्नशील रहें। उन्हें कभी भी शिक्षादि से वञ्चित न रक्खें। चाहे कितना भी कष्ट सहना पड़े, परन्तु सन्तान को योग्य बनाने में किसी प्रकार की न्यूनता न आने देवें।