Dayanand Yajurveda Bhashya Bhaskar Hindi

Yajurveda Adhyay 11 / Mantra 59

83 Mantra
11/59
Devata- अदितिर्देवता Rishi- सिन्धुद्वीप ऋषिः Chhand- आर्षी त्रिष्टुप् Swara- धैवतः
Mantra with Swara
अदि॑त्यै॒ रास्ना॒स्यदि॑तिष्टे॒ बिलं॑ गृभ्णातु। कृ॒त्वाय॒ सा म॒हीमु॒खां मृ॒न्मयीं॒ योनि॑म॒ग्नये॑। पु॒त्रेभ्यः॒ प्राय॑च्छ॒ददि॑तिः श्र॒पया॒निति॑॥५९॥

अदि॑त्यै। रास्ना॑। अ॒सि॒। अदि॑तिः। ते॒। बिल॑म्। गृ॒भ्णा॒तु॒। कृ॒त्वाय॑। सा। म॒हीम्। उ॒खाम्। मृ॒न्मयी॒मिति॑ मृ॒त्ऽमयी॑म्। योनि॑म्। अ॒ग्नये॑। पु॒त्रेभ्यः॑। प्र। अ॒य॒च्छ॒त्। अदि॑तिः। श्र॒पया॑न्। इति॑ ॥५९ ॥

Mantra without Swara
अदित्यै राम्नासिस्यदितिष्टे बिलङ्गृभ्णातु । कृत्वाय सा महीमुखाम्मृन्मयीँयोनिमग्नये । पुत्रेभ्यः प्रायच्छददितिः श्रपयानिति ॥

अदित्यै। रास्ना। असि। अदितिः। ते। बिलम्। गृभ्णातु। कृत्वाय। सा। महीम्। उखाम्। मृन्मयीमिति मृत्ऽमयीम्। योनिम्। अग्नये। पुत्रेभ्यः। प्र। अयच्छत्। अदितिः। श्रपयान्। इति॥५९॥

Dayanand Yajurveda Bhashya Bhaskar Hindi

हिन्दी
Dayanand Yajurveda Bhashya Bhaskar Hindi - हिन्दी
Meaning
हे अध्यापिका विदुषी! क्योंकि तू (अदित्यै) विद्याप्रकाश को (रास्ना) देने वाली (असि) है, अतः (ते) आपके पास से (बिलम्) ब्रह्मचर्य को धारण (कृत्वाय) करके (अदितिः) पुत्र और पुत्री विद्याओं को (गृभ्णातु) ग्रहण करें और वह (अदितिः) माता (मृन्मयीम्) मिट्टी की बनी हुई (योनिम्) पदार्थों को मिश्रित करने वाली (महतीम्) बड़ी (उखाम्) पाक-स्थाली को (अग्नये) अग्नि पर स्थापित करने के लिये (पुत्रेभ्यः) सन्तानों को (प्र+अयच्छत्) प्रदान करे। वे विद्या और सुशिक्षा से युक्त होकर (उखाम्) पाक-स्थाली में (इति) इस प्रकार (श्रपयान्) अन्न आदि को पकावें ॥११ । ५९॥
Essence
कुमार पुरुषों की पाठशाला में और कुमारियाँ स्त्रियों की पाठशाला में जा कर ब्रह्मचर्य का सेवन करके सुशीलता से विद्याओं को और पाक विधि को सीखें। आहार-विहारों को भी उत्तम नियम से सेवन करें ।
विषय-कथा कभी न सुनें। मद्य, मांस, आलस्य और अतिनिद्रा को छोड़कर अध्यापकों की सेवा और अनुकूलता से वर्ताव करके उत्तम व्रतों को धारण करें ॥ ११ । ५९॥
Subject
स्त्री पुरुष क्या करके, क्या करे, इसका फिर उपदेश किया है॥
Refrences
(बिलम्) निरु० (२ । १७) के अनुसार 'बिल' शब्द का अर्थ 'भर' (भरण) है। क्योंकि 'भर' शब्द 'भृ' धातु से निष्पन्न है ॥ ११ । ५९ ॥
Commentary Essence
दम्पती क्या करें--विदुषी अध्यापिका कुमारियों को विद्या-प्रकाश को प्रदान करने वाली हो। कुमारियाँ ब्रह्मचर्य को धारण करके विद्या और पाक-रीति को ग्रहण करें। वह विदुषी माता मिट्टी की बनी हुई, पदार्थों का जिसमें भली-भाँति मिश्रण हो सके, ऐसी बड़ी पाकस्थाली को अग्नि पर स्थापित करने के लिये दे अर्थात् पाक-विद्या सिखलावे। कुमारियाँ विद्या और सुशिक्षा से युक्त होकर पाक-स्थाली में विधिपूर्वक अन्न आदि का पाक करें।
तात्पर्य यह कि स्त्री-पुरुष कुमारों को पुरुषों की पाठशाला में और कुमारियों को स्त्रियों की पाठशाला में भेज देवें। वहाँ वे ब्रह्मचर्य को धारण करके सुशीलता से कुमार विद्याओं को ग्रहण करें और कुमारियाँ विद्या और पाकविधि को सीखें। नियमपूर्वक आहार-विहार का सेवन करें। विषय-कथा कभी न सुनें। मद्य, मांस और अतिनिद्रा का परित्याग करें। अध्यापकों की सेवा और अनुकूलता में रहकर उत्तम व्रतों को धारण करें ॥ ११ । ५९ ॥