Dayanand Yajurveda Bhashya Bhaskar Hindi

Yajurveda Adhyay 11 / Mantra 56

83 Mantra
11/56
Devata- अदितिर्देवता Rishi- सिन्धुद्वीप ऋषिः Chhand- विराडनुष्टुप् Swara- गान्धारः
Mantra with Swara
सि॒नी॒वा॒ली सु॑कप॒र्दा सु॑कुरी॒रा स्वौ॑प॒शा। सा तुभ्य॑मदिते म॒ह्योखां द॑धातु॒ हस्त॑योः॥५६॥

सि॒नी॒वा॒ली। सु॒क॒प॒र्देति॑ सुऽकप॒र्दा। सु॒कु॒री॒रेति॑ सुऽकुरी॒रा। स्वौ॒प॒शेति॑ सुऽऔप॒शा। सा। तुभ्य॑म्। अ॒दि॒ते॒। म॒हि॒। आ। उ॒खाम्। द॒धा॒तु॒। हस्त॑योः ॥५६ ॥

Mantra without Swara
सिनीवाली सुकपर्दा सुकुरीरा स्वौपशा । सा तुभ्यमदिते मह्योखान्दधातु हस्तयोः ॥

सिनीवाली। सुकपर्देति सुऽकपर्दा। सुकुरीरेति सुऽकुरीरा। स्वौपशेति सुऽऔपशा। सा। तुभ्यम्। अदिते। महि। आ। उखाम्। दधातु। हस्तयोः॥५६॥

Dayanand Yajurveda Bhashya Bhaskar Hindi

हिन्दी
Dayanand Yajurveda Bhashya Bhaskar Hindi - हिन्दी
Meaning
हे (महि) पूज्या (अदिते) अखण्डित आनन्द वाली स्त्री! जो तू (सिनीवाली) प्रेम प्रतिष्ठा से परिपूर्ण, (सुकपर्दा) उत्तम केशों वाली, (सुकुरीरा) सुन्दर आभूषणों से अलंकृत, (स्वौपशा) उत्तम पाक विद्या में कुशल है, सो तेरे लिये जो परिचारिका हाथों में (उखाम्) सूप=दाल आदि बनाने का साधन स्थाली को ([आ] दधातु) धारण करे उसका तू उत्तम रीति से सेवन कर ॥ ११ । ५६ ॥
Essence
श्रेष्ठ स्त्रियाँ सुशिक्षित, चतुर सेविकाओं को रखें। जिससे सब पाचक आदि सम्बन्धी कार्य यथासमय हों ॥ ११ । ५६ ।
Subject
स्त्रियों को कैसी दासी रखनी चाहिये, यह फिर उपदेश किया है॥
Refrences
(सुकुरीरा) यहाँ 'कृञ उच्च’ उणा० (४ । ३३) इस सूत्र से 'कृ' धातु से 'ईरन्' प्रत्यय है ॥ ११ । ५६ ॥
Commentary Essence
स्त्रियाँ कैसी सेविका रखें--श्रेष्ठ स्त्रियाँ प्रेम भावना से भरपूर, उत्तम केशों वाली, सुन्दर आभूषणों से अलङ्कृत, पाक-क्रिया में कुशल, सुशिक्षित सेविकाएँ रखें। जो स्त्रियों के लिये सूप-स्थाली आदि पात्रों को अपने हाथों में धारण करें, जिससे पाचक आदि से सम्बन्धित सब सेवाएँ यथा समय सिद्ध होवें ॥ ११ । ५६ ॥