Dayanand Yajurveda Bhashya Bhaskar Hindi

Yajurveda Adhyay 11 / Mantra 34

83 Mantra
11/34
Devata- अग्निर्देवता Rishi- भारद्वाज ऋषिः Chhand- निचृद्गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
तमु॑ त्वा पा॒थ्यो वृषा॒ समी॑धे दस्यु॒हन्त॑मम्। ध॒न॒ञ्ज॒यꣳ रणे॑रणे॥३४॥

तम्। ऊ॒ इत्यूँ॑। त्वा॒। पा॒थ्यः। वृषा॑। सम्। ई॒धे॒। द॒स्यु॒हन्त॑म॒मिति॑ दस्यु॒हन्ऽत॑मम्। ध॒न॒ञ्ज॒यमिति॑ धनम्ऽज॒यम्। रणे॑रण॒ इति॒ रणे॑ऽरणे ॥३४ ॥

Mantra without Swara
तमु त्वा पाथ्यो वृषा समीधे दस्युहन्तमम् । धनञ्जयँ रणेरणे ॥

तम्। ऊ इत्यूँ। त्वा। पाथ्यः। वृषा। सम्। ईधे। दस्युहन्तममिति दस्युहन्ऽतमम्। धनञ्जयमिति धनम्ऽजयम्। रणेरण इति रणेऽरणे॥३४॥

Dayanand Yajurveda Bhashya Bhaskar Hindi

हिन्दी
Dayanand Yajurveda Bhashya Bhaskar Hindi - हिन्दी
Meaning
हे वीर! जो तू (पाथ्यः) जल, अन्न आदि पदार्थों का उत्तम रीति से उपयोग करने वाला, तथा (वृषा) वीर्यवान्=बलवान्, ( रणे रणे) प्रत्येक युद्ध में विद्वान् तथा शौर्य आदि गुणों से युक्त है, सो (तम्) पूर्वोक्त पदार्थविद्या के वेत्ता, (धनञ्जयम्) शत्रुओं से धन को जीतने वाले, (उ) विचारपूर्वक (दस्युहन्तमम्) दस्युजनों का अत्यन्त हनन करने वाले (त्वा) आपको वीरसेना के द्वारा विद्वान् (सम्+ईधे) राजधर्म की शिक्षा से प्रकाशित करे॥
Essence
राजा आदि राजपुरुष आप्त विद्वानों से विनय, और शुद्ध-विद्या को प्राप्त करके, प्रजा की रक्षा के लिये चोरों का हनन करके, शत्रुत्रों को जीतकर परम ऐश्वर्य को उन्नत करें ॥११ । ३४ ॥
Subject
विद्वान् पुरुष विद्युत् को कैसे उत्पन्न करे, इसका फिर उपदेश किया है॥
Commentary Essence
विद्वान् विद्युत् को कैसे उत्पन्न करे-–वीर पुरुष जल, अन्न आदि पदार्थों का उत्तम रीति से उपयोग करने वाला, बलवान्, विद्वान् होकर प्रत्येक युद्ध में शौर्य आदि गुणों से युक्त हो। वह पूर्वोक्त अग्नि आदि पदार्थ-विद्या के वेत्ता, शत्रुओं से धन को जीतने वाले, दस्युओं का अत्यन्त हनन करने वाले राजा आदि वीर राजपुरुषों को आप्त विद्वान् लोग राजधर्म की शिक्षा से प्रदीप्त करें। राजा आदि वीर पुरुष आप्त विद्वानों से विनय आदि गुणों तथा शुद्ध विद्या को प्राप्त करके प्रजा की रक्षा के लिये चोरों का हनन तथा शत्रुओं को जीतकर परम ऐश्वर्य को बढ़ावें ॥११ । ३४ ॥