Dayanand Yajurveda Bhashya Bhaskar Hindi

Yajurveda Adhyay 11 / Mantra 31

83 Mantra
11/31
Devata- जायापती देवते Rishi- गृत्समद ऋषिः Chhand- निचृदनुष्टुप् Swara- गान्धारः
Mantra with Swara
संव॑साथास्व॒र्विदा॑ स॒मीची॒ऽउर॑सा॒ त्मना॑। अ॒ग्निम॒न्तर्भ॑रि॒ष्यन्ती॒ ज्योति॑ष्मन्त॒मज॑स्र॒मित्॥३१॥

सम्। व॒सा॒था॒म्। स्व॒र्विदेति॑ स्वः॒ऽविदा॑। स॒मीची॒ऽइति॑ स॒मीची॑। उर॑सा। त्मना॑। अ॒ग्निम्। अ॒न्तः। भ॒रि॒ष्यन्ती॒ऽइति॑ भरि॒ष्यन्ती॑। ज्योति॑ष्मन्तम्। अज॑स्रम्। इत् ॥३१ ॥

Mantra without Swara
सँवसाथाँ स्वर्विदा समीची उरसा त्मना । अग्निमन्तर्भरिष्यन्ती ज्योतिष्मन्तमजस्रमित् ॥

सम्। वसाथाम्। स्वर्विदेति स्वःऽविदा। समीचीऽइति समीची। उरसा। त्मना। अग्निम्। अन्तः। भरिष्यन्तीऽइति भरिष्यन्ती। ज्योतिष्मन्तम्। अजस्रम्। इत्॥३१॥

Dayanand Yajurveda Bhashya Bhaskar Hindi

हिन्दी
Dayanand Yajurveda Bhashya Bhaskar Hindi - हिन्दी
Meaning
हे स्त्री-पुरुषो! तुम यदि (समीची) अच्छी तरह से जानने वाले (भरिष्यन्ती) सबका पालन करने वाले और (स्वर्विदा) सुख को प्राप्त करने वाले होकर, (ज्योतिष्मन्तम्) प्रशंसनीय ज्योति से युक्त, (अन्तः) सबके अन्दर विद्यमान (अग्निम्) विद्युत् को (इत्) ही (त्मना) आत्मा और (उरसा) अन्तःकरण से (सम्+वसाथाम्) उत्तम रीति से आच्छादित करो, तो धन को प्राप्त हो ॥११ । ३१ ॥
Essence
जो मनुष्य विद्युत् को उत्पन्न करके स्वीकार कर सकते हैं; वे व्यवहार में दरिद्र नहीं होते ॥११ । ३१ ॥
Subject
स्त्री और पुरुष घर में रहकर क्या-क्या सिद्ध करें, इसका फिर उपदेश किया है॥
Commentary Essence
स्त्री-पुरुष घर में क्या सिद्ध करें-- स्त्री और पुरुष उत्तम विज्ञान वाले, सबका पालन करने वाले, सुख को प्राप्त करने वाले हों। वे प्रशंसनीय ज्योति वाली, सब पदार्थों में विद्यमान, अग्नि=विद्युत् को आत्मा और अन्तःकरण से सिद्ध करें। जो मनुष्य विद्युत् को उत्पन्न करके स्वीकार करते हैं वे लोक व्यवहार में दरिद्र नहीं होते ॥११ । ३१ ॥