Dayanand Yajurveda Bhashya Bhaskar Hindi

Yajurveda Adhyay 11 / Mantra 21

83 Mantra
11/21
Devata- द्रविणोदा देवता Rishi- मयोभूर्ऋषिः Chhand- आर्षी Swara- पञ्चमः
Mantra with Swara
उत्क्रा॑म मह॒ते सौभ॑गाया॒स्मादा॒स्थाना॑द् द्रविणो॒दा वा॑जिन्। व॒यꣳ स्या॑म सुम॒तौ पृ॑थि॒व्याऽअ॒ग्निं खन॑न्तऽउ॒पस्थे॑ऽअस्याः॥२१॥

उत्। क्रा॒म॒। म॒ह॒ते। सौभ॑गाय। अ॒स्मात्। आ॒स्थाना॒दित्या॒ऽस्थाना॑त्। द्र॒वि॒णो॒दा इति॑ द्रविणः॒ऽदाः। वा॒जि॒न्। व॒यम्। स्या॒म॒। सु॒म॒ताविति॑ सुऽम॒तौ। पृ॒थि॒व्याः। अ॒ग्निम्। खन॑न्तः। उ॒पस्थ॒ इत्यु॒पऽस्थे॑। अ॒स्याः॒ ॥२१ ॥

Mantra without Swara
उत्क्राम महते सौभगायास्मादास्थानाद्द्रविणोदा वाजिन् । वयँ स्याम सुमतौ पृथिव्या अग्निङ्खनन्तऽउपस्थे अस्याः ॥

उत्। क्राम। महते। सौभगाय। अस्मात्। आस्थानादित्याऽस्थानात्। द्रविणोदा इति द्रविणःऽदाः। वाजिन्। वयम्। स्याम। सुमताविति सुऽमतौ। पृथिव्याः। अग्निम्। खनन्तः। उपस्थ इत्युपऽस्थे। अस्याः॥२१॥

Dayanand Yajurveda Bhashya Bhaskar Hindi

हिन्दी
Dayanand Yajurveda Bhashya Bhaskar Hindi - हिन्दी
Meaning
हे (वाजिन्) ऐश्वर्य को प्राप्त विद्वान् ! जैसे--(द्रविणोदाः) धन के दाता हम लोग, इस (पृथिव्याः) भूमि से, इस (आस्थानात्) निवास स्थान के (उपस्थे) पास में (अग्निम्) अग्नि=रत्नों को खोदते हुए (महते) महान् (सौभगाय) उत्तम ऐश्वर्य की प्राप्ति के लिए (सुमतौ) श्रेष्ठ-बुद्धि में प्रवृत्त होते हैं, वैसे आप भी (उत्+क्राम) प्रयत्न कीजिये ॥११ । २१ ॥
Essence
मनुष्य इस संसार में ऐश्वर्य की प्राप्ति के लिये निरन्तर प्रयत्न करें।
परस्पर सम्मति करके पृथिवी आदि से रत्नों को प्राप्त करें ॥११ । २१ ॥
Subject
मनुष्यों को योग्य है कि इस संसार में परम पुरुषार्थ से ऐश्वर्य को उत्पन्न करें, यह उपदेश किया है॥
Commentary Essence
परम पुरुषार्थ से ऐश्वर्य की उत्पत्ति--जैसे धन के दाता पुरुष इस भूमि से एवं निवास-स्थान से अग्नि=रत्नों को खोदकर महान् उत्तम ऐश्वर्य की तथा उत्तम प्रज्ञा (बुद्धि) की प्राप्ति में प्रवृत्त होते हैं, वैसे ऐश्वर्य को प्राप्त करने वाले विद्वान् भी प्रयत्न करें। परस्पर सम्मति करके पृथिवी आदि से रत्नों को प्राप्त करें ॥११ । २१ ॥