Dayanand Yajurveda Bhashya Bhaskar Hindi

Yajurveda Adhyay 11 / Mantra 19

83 Mantra
11/19
Devata- अग्निर्देवता Rishi- मयोभूर्ऋषिः Chhand- निचृदनुष्टुप् Swara- गान्धारः
Mantra with Swara
आ॒क्रम्य॑ वाजिन् पृथि॒वीम॒ग्निमि॑च्छ रु॒चा त्वम्। भूम्या॑ वृ॒त्वाय॑ नो ब्रूहि॒ यतः॒ खने॑म॒ तं व॒यम्॥१९॥

आ॒क्रम्येत्या॒ऽक्रम्य॑। वा॒जि॒न्। पृ॒थि॒वीम्। अ॒ग्निम्। इ॒च्छ॒। रु॒चा। त्वम्। भूम्याः॑। वृ॒त्वाय॑। नः॒। ब्रूहि॑। यतः॑। खने॑म। तम्। व॒यम् ॥१९ ॥

Mantra without Swara
आक्रम्य वाजिन्पृथिवीमग्निमिच्छ रुचा त्वम् । भूम्या वृक्त्वाय नो ब्रूहि यतः खनेम तँवयम् ॥

आक्रम्येत्याऽक्रम्य। वाजिन्। पृथिवीम्। अग्निम्। इच्छ। रुचा। त्वम्। भूम्याः। वृत्वाय। नः। ब्रूहि। यतः। खनेम। तम्। वयम्॥१९॥

Dayanand Yajurveda Bhashya Bhaskar Hindi

हिन्दी
Dayanand Yajurveda Bhashya Bhaskar Hindi - हिन्दी
Meaning
हे (वाजिन्!) प्रशस्त विज्ञान वाले, विद्वान् सभापति राजन् ! आप (रुचा) प्रीति से शत्रुओं पर आक्रमण करके (पृथिवीम्) पृथिवी के राज्य और (अग्निम्) अग्नि विद्या की (इच्छ) कामना करो। और--
(भूम्याः) पृथिवी पर (नः) हमें (वृत्वाय) स्वीकार करके (ब्रूहि) भूगर्भविद्या और अग्नि विद्या का उपदेश कीजिये, जिससे हम लोग (तम्) उस पृथिवी को (खनेम) खोदें ॥११ । १९॥
Essence
मनुष्य-भूगर्भविद्या अग्नि विद्या के द्वारा पार्थिव पदार्थों की सुपरीक्षा करके सुवर्ण आदि रत्नों को उत्साह से प्राप्त करें।
Subject
मनुष्य जन्म प्राप्त करके, विद्या पढ़ के पश्चात् क्या करें, यह उपदेश किया है॥
Refrences
(वृत्वाय) यहां 'क्त्वो यक्' [अ० ७ । १ । ४७ ] इस सूत्र से क्त्वा को 'यक्' का आगम है ॥११ । १९ ॥
और जो खोदने वाले भृत्य लोग हैं, उन्हें भूगर्भविद्या और अग्निविद्या का उपदेश करें।
Commentary Essence
मनुष्य का कर्त्तव्य--प्रशस्त विज्ञान वाला सभापति राजा रुचि से शत्रुत्रों पर आक्रमण करके पृथिवी का राज्य प्राप्त करे। तत्पश्चात् भूगर्भविद्या और अग्नि विद्या के द्वारा पार्थिव पदार्थों का परीक्षण करके सुवर्ण आदि रत्नों को उत्साह से प्राप्त करें। जो उसके राज्य में भूमि को खोदने वाले भृत्य लोग हों, उन्हें भी भूगर्भ-विद्या का उपदेश करें ॥११ । १९॥