Dayanand Yajurveda Bhashya Bhaskar Hindi

Yajurveda Adhyay 11 / Mantra 14

83 Mantra
11/14
Devata- क्षत्रपतिर्देवता Rishi- शुनःशेप ऋषिः Chhand- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
योगे॑योगे त॒वस्त॑रं॒ वाजे॑वाजे हवामहे। सखा॑य॒ऽइन्द्र॑मू॒तये॑॥१४॥

योगे॑योग॒ इति योगे॑ऽयोगे। त॒वस्त॑र॒मिति॑ त॒वःऽत॑रम्। वाजे॑वाज॒ इति॒ वाजे॑ऽवाजे। ह॒वा॒म॒हे॒। सखा॑यः। इन्द्र॑म्। ऊ॒तये॑ ॥१४ ॥

Mantra without Swara
योगेयोगे तवस्तरँवाजेवाजे हवामहे । सखायऽइन्द्रमूतये ॥

योगेयोग इति योगेऽयोगे। तवस्तरमिति तवःऽतरम्। वाजेवाज इति वाजेऽवाजे। हवामहे। सखायः। इन्द्रम्। ऊतये॥१४॥

Dayanand Yajurveda Bhashya Bhaskar Hindi

हिन्दी
Dayanand Yajurveda Bhashya Bhaskar Hindi - हिन्दी
Meaning
हे (सखायः) मित्रो! जैसे हम लोग (ऊतये) रक्षा आदि के लिये (योगे योगे) प्रत्येक कार्य में, (वाजे वाजे) प्रत्येक संग्राम में (तवस्तरम्) अत्यन्त बलवान् (इन्द्रम्) परम ऐश्वर्यवान् राजा को (हवामहे) बुलाते हैं, स्वीकार करते हैं, वैसे तुम भी उसे बुलावो, स्वीकार करो ॥११॥'
Essence
जो लोग परस्पर मित्र होकर एक-दूसरे की रक्षा के लिये बलिष्ठ, धार्मिक राजा को स्वीकार करते हैं, वे निर्विघ्न होकर सुख से वृद्धि को प्राप्त होते हैं ॥११ । १४ ॥
Subject
प्रजाजन कैसे पुरुष को राजा मानें, इस विषय का उपदेश किया है ॥
Refrences
(तवस्तरम्) 'तवः' शब्द निघं० (२ । ९) में बल नामों में पढ़ा है। 'तवः' शब्द से 'तरप्' प्रत्यय करने पर 'तवस्तर' शब्द सिद्ध है।
Commentary Essence
प्रजा कैसे राजा को स्वीकार करे--प्रजा जन परस्पर मित्र होकर एक-दूसरे की रक्षा के लिये प्रत्येक व्यवहार में तथा प्रत्येक सङ्ग्राम में अत्यन्त बलवान्, और परम ऐश्वर्यवान् राजा को स्वीकार करें, क्योंकि जो ऐसा करते हैं वे निर्भय होकर सुखपूर्वक वृद्धि को प्राप्त करते हैं ॥११ । १४ ॥